बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में शिक्षण सत्र की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। पठन-पाठन की व्यवस्था राम भरोसे है। जिले के 129 स्कूलों में शिक्षक नहीं है।
हाल यह है कि इन स्कूलों का ताला खोलने की जिम्मेदारी दूसरे विद्यालय के शिक्षक को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं 722 स्कूल एक ही नियमित शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। इन स्कूलों में कोर्स पूरा कराने का जिम्मा अनुदेशक और शिक्षामित्रों के कंधे पर हैं।
नीति आयोग का आकांक्षी जिला सोनभद्र बुनियादी शिक्षा के मामले में पीछे हैं। यहां के 2061 स्कूलों में गुणवत्ता पूर्ण पठन-पाठन के लिए करीब दस हजार शिक्षकों की जरूरत है।
इसके सापेक्ष जिले में 4200 शिक्षक ही तैनात हैं। इसमें से भी 28 शिक्षक पिछले सत्र में रिटायर हो गए। बेसिक स्कूलों में छात्र-शिक्षक का अनुपात असंतुलित है।
आरटीई के मानकों के अनुसार, प्राथमिक में 30 और पूर्व माध्यमिक 35 बच्चों पर एक शिक्षक का होना अनिवार्य है। वहीं, जिले में कहीं 100 बच्चों को एक शिक्षक पढ़ा रहे हैं तो कहीं बच्चों की संख्या इससे भी ज्यादा है। जिले में 129 बेसिक विद्यालयों एक भी नियमित शिक्षक नहीं है।
बच्चों की पढ़ाई सिर्फ शिक्षामित्र और अनुदेशक करा रहे हैं। वहीं 722 स्कूल एक ही शिक्षक के भरोसे हैं। यह शिक्षक भी विभागीय कार्यों और अभिलेखों को दुरुस्त करने में ही उलझे रहते हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
अंतर जनपदीय तबादले के बाद छात्र-शिक्षक अनुपात और भी बिगड़ गया। विभाग की ओर से नामांकन बढ़ाने और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का अभियान तो चलाया जा रहा, मगर शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की जा रही है।