सोनांचल में गर्मी आते ही जिले में पेयजल संकट गहरा जाता है। कुछ गांवों में अभी से जलस्तर कम होने लगा है। इससे पानी की समस्या उत्पन्न होने की आशंका बढ़ने लगी है। पंचायती राज विभाग जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है। फिर भी जल संचयन को लेकर नक्सल व पहाड़ी क्षेत्र के लोग गंभीर नहीं है।
ठंड का असर कम होते ही गर्मी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। दिन में तेज धूप से लोग परेशान हो जा रहे हैं। पानी की मांग बढ़ने लगी है। जिले में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है वैसे-वैसे नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दिन प्रतिदिन पीने के पानी की किल्लत बढ़ने लगती है। अभी से राबर्ट्सगंज से सटे उरमौरा, लोढ़ी, कमोजी समेत अन्य गांवों में कई हैंडपंपों ने पानी उगलना छोड़ दिया है। भीषण गर्मी शुरू होने पर ओबरा क्षेत्र के चोपन रोड, सुमन नगर, चूड़ी गली, सिनेमा रोड, मिल्लत नगर, गैस गोदाम रोड आदि दर्जनों स्थानों पर पेयजल संकट गहरा जाता है।
यही आलम ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी का हो जाता है। इसके तहत आने वाले क्षेत्र कर्बला, भलुआ टोला, बिल्ली गांव, खैरटिया गांव सहित पूरे ग्राम पंचायत क्षेत्र में पानी की समस्या बढ़ जाती है। दूसरी ओर रेणुका पार के दर्जनों गांव चकाड़ी, गुरूड़, निंगा, बगबइसा, अरंगी, कड़ीया, कासपानी, मैराडाड़, पनारी, लोहियाकुंड, फफराकुंड, चैना टोला आदि गांवों में गर्मी के चलते पानी का जलस्तर नीचे चले जाने से लोग रेणु नदी का राख मिश्रित गंदा पानी पीने को विवश हो जाते हैं। ग्रामीण चुआड़ का दूषित पानी पीकर बीमार अलग होते हैं। हालांकि जिले के 629 ग्राम पंचायतों में से करीब पांच सौ ग्राम पंचायतों ने टैंकर क्रय किया है। गर्मी के दिनों में ग्राम पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों में टैंकरों से पानी आपूर्ति कराती हैं लेकिन अप्रैल और मई में गर्मी के विकराल रूप धारण करने से जरूरत के अनुसार लोगों को टैंकरों से पेयजलापूर्ति करना भी चुनौती बन जाता है।
अंधाधुंध खोदाई से जल स्रोत नीचे खिसका
सोनभद्र। जिले के कई इलाकों में पत्थर खदानों की अत्यधिक खोदाई होने से भी पेयजल संकट ज्यादा गहराया है। बिल्ली-मारकुंडी और सुकृत खनन क्षेत्र की खदानों में अंधाधुंध खनन से खदानें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि जल स्रोत से नीचे का पानी आना शुरू हो गया है। खदानों में पानी भरने के कारण कार्य प्रभावित होता है। खननकर्ता मोटी कमाई के लिए बड़ी बड़ी मशीनें लगाकर लाखों लीटर पानी प्रतिदिन बहा देते हैं। जानकारों का कहना है कि जलस्तर नीचे जाने का यह एक सबसे प्रमुख कारण है। क्षमता से अधिक खदानों की खोदाई को लेकर अधिकारी अपनी आंखें बंद किए हुए हैं।
पेयजल की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है। जरूरत के अनुसार ग्राम पंचायतें टैंकरों से पेयजलापूर्ति करेंगी, इसकी मॉनिटरिंग सेक्रेटरी करेंगे। - डॉ. अमित पाल शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी सोनभद्र।