विकास भवन सभागार में दूसरे दिन चार ब्लॉकों के पंचायत प्रतिनिधियों को डीपीआरओ ने प्रशिक्षण दिया और बताया कि किस तरह से खर्च के बगैर प्लास्टिक से मुक्त ग्राम पंचायत बन सकेंगी। बताते चलें कि ग्राम पंचायत स्तर पर प्लास्टिक मुक्ती का कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत गांव से जुड़े जन प्रतिनिधियों को जानकारी दी जा रही है।
सोनभद्र जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए ग्राम पंचायतों से शुरू होने वाली प्रक्रिया नो कॉस्ट और लो कॉस्ट पर आधारित होगी। हर व्यक्ति अपने घर पर बोरा टांगकर उसमें पॉलीथिन एकत्रित करेगा। बाद में उसे ग्राम पंचायत और फिर ब्लॉक के जरिए प्लास्टिक मैनेजमेंट यूनिट तक पहुंचाया जाएगा। ग्राम प्रधान और सचिवों के प्रशिक्षण के दूसरे दिन डीपीआरओ नमिता शरण ने यह जानकारी दी।
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बुधवार को चोपन, म्योरपुर, बभनी और दुद्धी ब्लॉकों के प्रधान, सचिव, पंचायत सहायक, सफाई कर्मी प्रशिक्षण में शामिल हुए। डीपीआरओ ने कहा कि इस अभियान में किसी भी तरह की कोई धनराशि का व्यय नहीं होगा। रोजाना सुबह गांव के लोगों को बैठक कर उनको प्लास्टिक निस्तारण के बारे में जागरूक करेंगे। कर्मचारी एवं गांव के लोगों को साथ लेकर गांव से प्लास्टिक को इकट्ठा कर लेंगे।
इसके बाद उन्हीं के घरों से बोरी मांग कर एक व्यवस्थित जगह पर बोरी टांगेंगे, जिससे उसमें प्लास्टिक कचरा रखने में सहूलियत हो। ई रिक्शा के माध्यम से प्रतिदिन बोरियों में से प्लास्टिक इकट्ठा करेंगे। इकट्ठा प्लास्टिक ग्राम पंचायत में निर्मित आरआरसी सेंटर का प्रयोग हम कूड़े को रखने के लिए करेंगे। ग्राम पंचायत से खरीदे गए ई-रिक्शा से प्लास्टिक का संकलन घर-घर से करेंगे। इस प्रकार प्लास्टिक फ्री बनाने में हमें किसी अन्य मद की कोई आवश्यकता नहीं होगी।