नये कृषि कानून का विरोध कर रहे और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून गांरटी की मांग कर रहे किसान संगठनों का दिल्ली की सीमा पर आंदोलन तथा विरोध प्रदर्शन जारी है। आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर बुधवार ब्लैक डे (काला दिवस) मनाया गया। पूर्वांचल नव निर्माण मंच तथा पूर्वांचल नव निर्माण किसान मंच के किसानों नें अपने-अपने घरों पर काले झंडे लगाकर ब्लैक डे मनाया। मंच के अध्यक्ष श्रीकांत त्रिपाठी के नेतृत्व में किसानों ने काले झंडे फहरा कर नारेबाजी की।
संगठन के कार्यालय पर पहुंचे पन्नूगंज थाना प्रभारी भुवनेश्वर पांडेय को मंच के अध्यक्ष ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपकर तीनों कृषि कानून वापस कराने की मांग की। गिरीश पांडेय ने कहा देश के सभी किसानों को आगे आकर सरकार के दोषपूर्ण कृषि कानून के खिलाफ मोर्चा खोल कर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी की मांग करना चाहिए। इस मौके पर रमाशंकर मौर्या, सूर्य कुमार सिंह, दयाशंकर सिंह, अनिल गुप्ता, विनय पटेल, आलोक कुमार, सूरज सिंह, बबल, उदय प्रकाश सिंह, निर्भय पटेल, पिंटू, प्रबल, दामोदर, बेचन, ओमप्रकाश, प्रभात आदि रहे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालय पर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिला सचिव कामरेड आरके शर्मा के नेतृत्व में किसानों, मजदूरों की मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। हाथों में काली पट्टी और काले झंडे लहराते हुए सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए काला दिवस मनाया। कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी किए। इस मौके पर कामरेड अमरनाथ सूर्य, दिनेश्वर वर्मा, कमला प्रसाद, श्रीमती राजकुमारी, अरविन्द सोनी, अनिल तिवारी, सुभाष भारती, लल्लन सोनकर, मोहम्मद अनीस, ब्रह्मा साहनी, राकेश चौधरी, मोहम्मद आरिफ, वंशराज सोनकर व छोटे लाल साहनी आदि रहे।
वहीं आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट, जय किसान आंदोलन से जुड़े मजदूर किसान मंच, वर्कर्स फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव में विरोध प्रदर्शन किया। मजदूर किसान मंच के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गोंड़ व आइपीएफ प्रवक्ता कृपाशंकर पनिका ने कहा कि कारपोरेट हितों के लिए जिस तरह से मोदी सरकार ने किसानों के प्रति संवेदनहीन, दमनात्मक व अमानवीय रूख अपनाया है और कोरोना महामारी से निपटने में आपराधिक लापरवाही बरती है। उससे साफ हो गया है कि यह एक विफल सरकार है और अब इसने सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है।कार्यकर्ताओं ने किसान विरोधी तीनों काले कृषि कानूनों और मजदूर विरोधी लेबर कोड रद करने, विद्युत संशोधन विधेयक 2021 को वापस लेने की मांग की। इस मौके पर तेजधारी गुप्ता, मंगरू प्रसाद गोंड़, सूरज कोल, श्रीकांत सिंह, रामदास गोंड़, शिव प्रसाद गोंड़, महावीर गोंड, मनोहर गोंड़, कैलाश चौहान, सेवालाल कोल, रामफल गोंड़, विनोद यादव आदि रहे।