अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए), रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) तथा भाकपा (माले) लिबरेशन के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपा। ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने तथा नई शिक्षा नीति-2020 को वापस लेने सहित कई मांगें उठाई गईं।
इससे पहले कार्यकर्ताओं ने सदर तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों से छात्र-युवा लगातार प्रभावित हो रहे हैं। यूपीएसआई, लेखपाल, शिक्षक भर्ती, एसएससी, नीट और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
संगठन का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए संबंधित एजेंसियों और सरकार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से बड़ी संख्या में परीक्षाएं कराए जाने से परीक्षा प्रणाली का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ है, जिससे पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की घटनाएं बढ़ी हैं।