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Sonebhadra News: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी आरोपी को रिमांड पर रखने से कोर्ट नाराज

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हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पॉक्सो एक्ट के आरोपी को रिमांड पर रखने से विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) एक्ट सोनभद्र अमित वीर सिंह की अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है। विवेचक के कृत्य को कदाचार की श्रेणी में मानते हुए आरोपी को तत्काल न्यायिक अभिरक्षा से मुक्त करने का आदेश दिया। आदेश की प्रति आईजी व एसपी को भी प्रेषित करने को कहा।
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मामला सदर कोतवाली क्षेत्र का है। पूरब मोहाल निवासी सन विजय उर्फ रिंकू ने अधिवक्ता रोशनलाल यादव के जरिए 8 मई को कोर्ट में रिमांड निरस्तीकरण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें बताया गया कि हाईकोर्ट इलाहाबाद की ओर से 14 मार्च को रिट पेटीशन स्वीकार करते हुए दंडात्मक कार्रवाई पर अग्रिम तिथि तक रोक लगाकर सभी पक्षों को नोटिस करने का आदेश पारित किया गया है। बावजूद इसके कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए विवेचक सुजीत कुमार सेठ ने तीन मई को प्रथम रिमांड पेश कर स्वीकृत कराकर आरोपी को जेल में निरुद्ध कर दिया।
उसके बाद बढ़ी हुई धाराओं में 6 मई को रिमांड स्वीकृत किया गया है। कोर्ट ने इस मामले में विवेचक को तलब करते हुए लिखित जवाब मांगा था। विवेचक सुजीत कुमार सेठ के लोकसभा चुनाव ड्यूटी में व्यस्त रहने के कारण रॉबर्ट्सगंज थानाध्यक्ष सतेंद्र कुमार राय ने जवाब प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर कोर्ट ने कहा कि मामले में केवल कुछ धाराओं की वृद्धि होने से हाईकोर्ट का आदेश निष्प्रभावी नहीं होता है। आरोपी को गिरफ्तार कर उसके रिमांड प्रदान करने की सभी कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में अवैध है। विवेचक ने हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। यह कृत्य कदाचार की श्रेणी में आता है। ऐसे में कोर्ट आरोपी सन विजय उर्फ रिंकू का रिमांड निरस्तीकरण प्रार्थना पत्र स्वीकार करने के लिए बाध्य है।
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