फर्म स्वामियों द्वारा जांच में सहयोग न करने और लगातार संपर्क से बचने पर शक और गहरा गया। भवन स्वामी ने लिखित रूप से बताया कि करीब दो वर्षों में फर्म मालिक सिर्फ 5–6 बार ही दुकान पर आए और शुरुआत में 3–4 पेटी दवा रखकर गायब हो गए। स्थानीय लोगों ने भी पुष्टि की कि यहाँ कोई वास्तविक कारोबार नहीं होता था।
जांच में सामने आया कि दोनों फर्मों ने कागजों में लाखों सिरप की खरीद दिखाई, जबकि दुकानें अस्तित्वहीन अवस्था में मिलीं। औषधि निरीक्षक राजेश मौर्य का कहना है कि कोडीन आधारित यह सिरप नशे के तौर पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है और काले बाजार में ऊँचे दामों पर बिकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शैली ट्रेडर्स के प्रो. भोला प्रसाद जायसवाल ने कई जिलों में इस तरह की फर्जी फर्मों को भारी मात्रा में कोडीनयुक्त दवाएं बेची हैं। वाराणसी सहित अन्य जिलों में भी इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।
औषधि निरीक्षक ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए संबंधित फर्म मालिकों के खिलाफ औषधि अधिनियम 1940, भारतीय न्याय संहिता 2023 तथा एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए शनिवार की रात राबटर्सगंज कोतवाली में तहरीर सौंपी। बताते चलें कि प्रशासनिक स्तर पर यह अब तक का सबसे बड़ा कोडीन सिरप घोटाला बताया जा रहा है, जिसमें दस्तावेजी हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाने का आरोप है।
इनके इनके ऊपर दर्ज की गई प्राथमिकी
प्रभारी निरीक्षक माधव सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मां कृपा मेडिकल बरकरा के स्वामी सत्यम कुमार और फर्म मेसर्स शिविक्षा फार्मा के विजय गुप्ता निवासी के 64/1ए, गोला दिनानाथ, कबीर चौरा, वाराणसी, पोस्ट-वाराणसी, जनपद-वाराणसी, रांची के पते पर पंजीकृत फर्म शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला प्रसाद जायसवाल हालपता-ए 9/24जे, कायस्थ टोला, प्रहलाद घाट, थाना-आदमपुर, वाराणसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच तेजी से की जा रही है।