सोनभद्र। कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से किए गए जनता कर्फ्यू के आह्वान के मद्देनजर रविवार को शाम पांच बजते ही लोग राष्ट्र सेवकों के सम्मान में अपने घरों के दरवाजों व छतों पर निकल पड़े। अपने घरों के दरवाजों और छतों से लोगों ने राष्ट्रसेवकों के सम्मान में ताली बजाईं, शंखनाद किया और थालियां, घंटियां बजाकर उनका सम्मान बढ़ाया। प्रशासन,पुलिस व स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों ने रूट मार्च किया और इस दौरान वे भी तालियां बजाते रहे। पुलिस की गाड़ी में लगे लाउड स्पीकर से घंटी, ताली और थाली की आवाज गूंजती रही। लोग पांच मिनट से अधिक समय शंख के साथ ही थालियां व तालियां बजाते रहे। इससे पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
उधर, जिलाधिकारी एस राजलिंगम व पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव भी पांच बजते ही पुलिस फोर्स व अधिकारियों के साथ वाहनों से सड़कों पर तालियां बजाकर लोगों से इसके लिए आह्वान करते दिखे। प्रशासन, पुलिस के अधिकारियों के साथ पुलिस फोर्स के अलावा एंबुलेेंस भी रूट मार्च में शामिल रहे। अधिकारियों के वाहनों व एंबुलेंस में मौजूद कर्मी लाउडस्पीकर से थाली व घंटी बजाने की आवाज गुंजवाते रहे। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक बढ़ौली चौक, सिविल लाइंस, महिला थाना, मेन मार्केट होते हुए मेन चौक पर पहुंचे।
उधर, बढ़ौली चौक से एडीएम, एएसपी, एसडीएम सदर सहित अन्य अधिकारी पेट्रोल पंप होते हुए मेन चौक पहुंचे। यहां जब लोग सड़कों पर आकर शंख, थालियां व तालियां बजाने लगे तो जिलाधिकारी व अन्य अफसरों ने लोगों से घरों के दरवाजों पर रहकर ही शंख आदि बजाने की अपील की।उधर, जिले के अन्य क्षेत्रों में भी शाम पांच बजते ही लोग घरों के दरवाजों व छतों पर पहुंचकर शंख, थालियां व तालियां बजाने लगे। पांच मिनट तक शंक व थालियों की आवाज से वातावरण गुंजता रहा। इस दौरान जगह-जगह पुलिस के जवान भी लोगों से घरों के दरवाजों पर रहकर ही लोगों से घंटे, थालियां व तालियां बजाने की अपील करते दिखे। घोरावल प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में क्षेत्र में शाम पांच बजते ही बड़ों के साथ छोटे बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग भी थालियां व तालियां बजाते दिखे।
रामगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार रामगढ़ बाजार लोग घरों के गेट व छतों पर घंटी व थालियां बजाते रहे। दुद्धी, घोरावल, म्योरपुर, चोपन, बभनी, अनपरा, ओबरा, डाला, कर्मा, केकराही, खलियारी, वैनी, बीजपुर, शक्तिनगर, कोन सहित अन्य इलाकों में भी लोग पांच बजते ही छतों व घरों के दरवाजों पर पहुंचकर शंख, थालियां व तालियां बजाने लगे। यह क्रम पांच मिनट से अधिक समय तक चलता रहा।