कोयले की कमी के कारण अनपरा ए व बी परियोजना को इकाइयों को लगातार कम लोड पर चलाया जा रहा है। इससे प्रतिदिन 6 मियू से अधिक बिजली का नुकसान हो रहा है। अनपरा परियोजना की सभी इकाइयों की बिजली पावर कारपोरेशन को तीन रूपये प्रति यूनिट से भी कम दर पर प्राप्त होती है।
तापीय परियोजनाओं से उत्पादन बंद होने से सरकार को एनर्जी एक्सचेंज से पीक ऑवर में 13 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ रही है, जबकि सस्ते दर पर सिर्फ अनपरा परियोजना से ही रोज एक करोड़ 80 लाख की बिजली का नुकसान हो रहा है।
उत्पादन निगम का पावर कॉरपोरेशन पर बिजली के एवज में आठ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। भुगतान से पावर कॉरपोरेशन के हाथ खड़ा करने से ही उत्पादन निगम की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।
बिजली घरों में कोयला संकट के दौर में प्रदेश में बिजली की मांग लगातार 19 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। तापीय परियोजनाओं से उत्पादन कम होने के कारण केंद्रीय पूल व एनर्जी एक्सचेंज से बिजली आयात करने के बाद भी सूबे के विभिन्न इलाकों में विद्युत कटौती का सिलसिला जारी है।
हालांकि त्योहारी सीजन को देखते हुए शहरी क्षेत्रों को अभी कटौती से मुक्त रखा गया है। मंगलवार सुबह तक प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 19528 मेगावाट दर्ज की गई। शाम तक मांग 15940 मेगावाट पहुंच गई थी। पीक ऑवर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।