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Sonebhadra News: जनजाति महिलाओं के जरिये जमीन हथियाने पर सीएम ने मांगी रिपाेर्ट

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सोनभद्र। जनजाति समाज की महिलाओं से शादी कर उनकी जमीनें हथियाने के मामले को सीएम योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया है। अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए सीएम ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। डीएम बीएन सिंह के निर्देश पर एडीएम वागीश कुमार शुक्ल ने एसडीएम दुद्धी से आख्या ली। साथ ही अधिवक्ता के साथ पहुंचीं रजिया और नन्हकी के बयान दर्ज किए। दोनों के बयान में भी अनुसूचित जनजाति की जमीनें खरीदने-बेचने की बात पता चली है। जल्द ही रिपोर्ट सीएम को भेजी जाएगी।
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भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने दो नवंबर को सीएम योगी से लोक भवन में मुलाकात की थी। उन्होंने पत्रक सौंपते हुए बताया था कि बघाड़ू और आस-पास के क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं से शादी रचाकर, संबंध बनाकर जनजाति समाज की जमीनें खरीदी जा रही हैं। यही नहीं, 100 रुपये के स्टांप पर उस जमीन की बिक्री कर बाहर से आए मुस्लिम परिवारों को बसाया जा रहा है।
अमर उजाला ने इस मसले को प्रमुखता से उठाया तो मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली। डीएम के निर्देश पर एडीएम ने एसडीएम से अब तक की कार्रवाई व प्रकरण की रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को अधिवक्ता के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची रजिया और नन्हकी ने एडीएम के यहां अपने बयान दर्ज कराए।
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सूत्र बताते हैं कि रजिया और नन्हकी ने जनजाति समाज की कई जमीनें खरीदने की बात स्वीकार की है। खरीदी गई जमीनों के लिए धन किसके जरिये और कहां से जुटाया गया? जमीनें किसके लिए खरीदी गईं और किसे उपलब्ध कराई गईं, इस बिंदु पर उनसे पूछताछ की गई। मामले में एसडीएम दुद्धी ने जमीनों के बैनामे शून्य करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पहले थी सरदार की दुलारी, शादी के बाद बन गई बहादुर की रजिया
खुद को हिंदू और अनुसूचित जनजाति दर्शाते हुए जमीनों का बैनामा कराने वाली रजिया के बारे में नई जानकारी सामने आई है। सूत्र बताते हैं कि शादी से पहले उसका नाम दुलारी पनिका था। पिता सरदार पनिका और मां रजकलिया की बेटी दुलारी की बहादुर अली के साथ शादी के बाद उसका नाम रजिया हो गया। आरोप है कि परिवार रजिस्टर में रजिया खातून, धर्म मुस्लिम और आधार कार्ड में रजिया पत्नी बहादुर अली निवासी बघाड़ू दर्ज होने के बावजूद सामाजिक तौर पर जनजाति नाम बरकरार रखते हुए, बोलचाल में नाम के आगे पनिका लगाए रखा। इसी के जरिए जमीनों की खरीद-बिक्री की गई।

पति की मौत के बाद बहादुर के संपर्क में आई थी नन्हकी
छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे सुंदरी गांव निवासी नन्हकी के जरिये मुस्लिमों के लिए अनुसूचित जनजाति की जमीन खरीदने के मामले में भी दिलचस्प कहानी सामने आई है। बताया जा रहा है कि नन्हकी की कम उम्र में ही शादी हो गई थी। बाद में उसके पति का निधन हो गया। काम करने के दौरान वह एक मुस्लिम बिरादरी के व्यक्ति के संपर्क में आ गई। इसके बाद बहादुर के परिचित सिराजुद्दीन से उसने शादी कर ली। फिर वह बहादुर के लिए जनजाति समाज की जमीनें उपलब्ध कराने का साधन बन गई।

झारखंड-छत्तीसगढ़ से सटा इलाका है खासा संवेदनशील
कहा जा रहा है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा जनजाति आबादी वाला दुद्धी तहसील क्षेत्र झारखंड-छत्तीसगढ़ से सटा है। बघाड़ू की तरह कई और गांवों में इसी तरह से जमीन हासिल करने के साथ ही बाहर से आए लोगों को बसाया भी गया है। इसमें झारखंड और छत्तीसगढ़ से आने वालों की संख्या अच्छी-खासी बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि दुद्धी तहसील में महज बभनी और दुद्धी ब्लाक की गहराई से पड़ताल कई प्रकरण सामने ला सकती है
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डीएम के निर्देशन में मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। एसडीएम से जरूरी जानकारी लेने के साथ ही रजिया-नन्हकी के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। एक-दो दिन में रिपोर्ट आगे भेज दी जाएगी। - वागीश कुमार शुक्ला, एडीएम।
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