तीन दिन बाद शुक्रवार को दिन चढ़ने के उपरांत ऊर्जांचल में सूर्यदेव ने बादलों की ओट से झांकते हुए दर्शन दिया। इस दौरान आसमान में छाए बादलों के झुरमुट ने सूर्यदेव की तपिश को थामते हुए उनके असर को लगभग निष्प्रभावी कर दिया। गलन से बचाव के लिए अलाव ही नागरिकों का सहारा बना रहा।
दो दिन बारिश व बादलों की घेराबंदी के बाद शुक्रवार को मौसम साफ तो हुआ लेकिन सूरज की तपिश नदारद रही। कमरे के अंदर भी बेतहाशा गलन के कारण लोग दिन चढ़ने तक बिस्तर में ही दुबके रहे। ठंड के प्रकोप को देखते हुए सुबह मार्निंग वाक करने वालों की संख्या भी दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। साहस जुटाकर कंपकंपाते हुए बाहर निकले लोग भी चौराहों पर जल रहे अलाव के इर्द-गिर्द अड्डेबाजी करते देखे गये। मौसम के रुख को देखते हुए आगामी दिनों में ठंड में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।