करेला-शक्तिनगर के बीच रेल पथ दोहरीकरण के लिए भू-अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। विशेषज्ञ समूह ने इस निमित्त संस्तुति दे दी है। सब कुछ ठीक रहा तो नए साल में दोहरे ट्रैक पर ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।
पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के तहत आने वाले ऊर्जांचल के स्टेशनों को जोड़ने वाली रेल लाइनों का दोहरीकरण किया जा रहा है। इसी के साथ विद्युतीकरण भी हो रहा है। इसके पीछे मकसद ज्यादा कोयला ढुलाई के साथ यात्रियों को कम समय में गंतव्य स्थान तक पहुंचाना है। दोहरीकरण की राह में भू-अधिग्रहण रोड़ा बना तो कई जगह निर्माण कार्य प्रभावित होने लगे। अनपरा गांव के एक हिस्से में भी भूमि अधिग्रहण नहीं होने से कार्य बाधित हुआ। इसके बाद अधिग्रहण के लिए बहुशाखीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया। समूह की अध्यक्ष व संयोजक काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी की प्रोफेसर श्वेता प्रसाद को बनाए जाने के साथ कुल नौ पदाधिकारियों व सदस्यों को शामिल किया गया। समूह का कार्य भूमि अधिग्रहण से संबंधित सभी पक्षों का मूल्यांकन करना था। गठन के बाद समूह के पदाधिकारियों व सदस्यों ने कई बैठकें की और स्थलीय निरीक्षण कर प्रभावित पक्षों को समझने का कार्य किया। समूह ने माना कि भूमि अर्जन से संभावित लाभ परियोजना के निर्माण के सामाजिक खर्च एवं प्रतिकूल सामाजिक समाघात के तुलना में अधिक है। इसके बाद योजना से प्राप्त लाभों के आलोक में समूह भूमि अर्जन की संस्तुति कर दी। पूर्व मध्य रेलवे (धनबाद) के जनसंपर्क अधिकारी प्रभात कुमार मिश्रा ने बताया कि दोहरीकरण की प्रक्रिया में आ रहे गतिरोधों को दूर किया जा रहा है।