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Sonebhadra News: विधायकों से मदद मांग रहे कैंसर मरीज, एक साल में ही 150 पहुंचे

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जिले में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विभिन्न तरह के कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए उपचार का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे मरीज मदद के लिए भटक रहे हैं। विधायकों के पास मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष से सहायता राशि पाने के लिए आने वाले सबसे ज्यादा मरीज कैंसर के ही हैं।
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सिर्फ इस वित्तीय वर्ष में ही चार विधायकों के यहां 150 से भी ज्यादा मरीज पहुंचे हैं। जिले में कैंसर के बढ़ते प्रभाव का कारण प्रदूषण और खराब खानपान का बताया जा रहा है। कुछ वर्षों पहले तक जिले में कैंसर के मामले काफी सीमित थे।
पान, गुटखा, सिगरेट का बेतहाशा इस्तेमाल करने वाले ही ज्यादातर मुख कैंसर की चपेट में आते थे। महज कुछ वर्षों में ही स्थितियां तेजी से बदली हैं। मुख कैंसर के अलावा पेट, प्रोस्टेट कैंसर, ब्लड कैंसर, फेफड़े और महिलाओं में गर्भाशय व स्तन कैंसर के मामले बढ़े हैं।
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जिले में स्क्रीनिंग व उपचार की व्यवस्था न होने से ऐसे मरीजों का कोई विवरण स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है, लेकिन बीमारी से ग्रसित लोग लगातार जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचकर महंगी चिकित्सा के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगा रहे हैं।
कोयला, क्रशर व बिजली परियोजनाओं वाले क्षेत्र ओबरा के विधायक व राज्यमंत्री संजीव सिंह गोंड ने इस वित्तीय वर्ष में करीब 70 कैंसर मरीजों के उपचार के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष से मदद देने के लिए पत्र लिखा है तो दुद्धी विधायक विजय सिंह गोंड ने भी 50 कैंसर मरीजों की मदद का प्रस्ताव दिया है।
कुछ ऐसी ही स्थिति घोरावल विधायक अनिल मौर्य और रॉबर्ट्सगंज विधायक भूपेश चौबे का भी है। इन आंकड़ों पर गौर करें तो पूरे जिले से 150 से अधिक कैंसर मरीजों के प्रकरण मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष से आर्थिक मदद के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय भेजे गए हैं।
ज्यादातर में धनराशि भी स्वीकृत हुई है। आदिवासी बहुल जिले में कैंसर के बढ़ते आंकड़ों के पीछे प्रदूषण और खराब जीवनशैली को माना जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों को बीमार कर रहा है। धुल, धुएं के कण हवा के जरिए शरीर में पहुंचकर बीमारी का कारण बन रहे हैं।


सिर्फ तंबाकू ही नहीं, इसलिए भी होता है कैंसर
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसएस पांडेय बताते हैं कि कैंसर होने के 40 से 45 फीसदी मामलों में ही तंबाकू कारण होता है। इसकी वजह से मुंह, फेफड़े और जीभ का कैंसर होता है। इसके अलावा 5 से 7 फीसदी मामले आनुवंशिक होते हैं। अगर माता- पिता में किसी को कैंसर है तो बच्चे में भी यह जा सकता है। इसके अलावा 50 फीसदी मामलों में खराब जीवनशैली और खानपान कारण है। पौष्टिक भोजन की बजाय फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन, ज्यादा तेल-मसाला वाला भोजन, मोटापा, कम शारीरिक सक्रियता भी कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। शराब के सेवन के साथ वातावरण में अत्यधिक प्रदूषण, खराब पानी और हवा भी कैंसर की बीमारी की वजह बनता है।

वाराणसी या प्रयागराज जाना पड़ता है
मौजूदा समय में कैंसर की जांच व उपचार के लिए जिले में कोई सुविधा नहीं है। संदिग्ध मरीजों को वाराणसी, प्रयागराज या अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है। उपचार के अलावा आवागमन में भी मरीज भारी खर्च उठाते हैं। आम बजट में सरकार ने कैंसर की रोकथाम के लिए डे केयर सेंटर खोलने का एलान किया है। देश के सात सौ जिलों में यह सेंटर खोले जाएंगे। इस सेंटर के खुलने से मरीजों को सहूलियत मिलने की उम्मीद है।

कैंसर में मामलों में वृद्धि चिंताजनक है। इससे खुद को सुरक्षित रखने के लिए व्यक्ति को सतर्क रहना होगा। अपने खान-पान को बदलें। जीवनशैली में बदलाव लाएं। शराब, तंबाकू तो छोड़े हीं, फास्ट फूड से भी दूरी बनाएं। रोजाना कुछ देर व्यायाम करें। शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं। नियमित स्क्रीनिंग भी उपयोगी होगी। लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए टीकाकरण शुरू किया गया है। इसे अन्य ब्लॉकों में भी लागू किया जाएगा। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।

विधायक बनने के बाद पिछले दस माह में 50 कैंसर मरीजों के उपचार के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष से धनराशि देने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस क्षेत्र में बीमारी की मुख्य वजह बेतहाशा प्रदूषण है। पारा, फ्लोराइड मिश्रित पानी लोग पी रहे हैं। धूल, धुएं के कण भी बीमार कर रहे हैं। यह गंभीर समस्या है। इसके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। -विजय सिंह गोंड, विधायक, दुद्धी।
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