सोनभद्र। नगर स्थित जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में शनिवार को एसीएमओ डॉ. आरजी यादव की अध्यक्षता में मीडिया वर्कशॉप का आयोजन हुआ। इसमें 22 नवंबर से जिले में चलाए जाने वाले फाइलेरिया मुक्ति अभियान को सफल बनाने पर चर्चा की गई। एसीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया क्यूलेकस मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है। जिसे सामान्यत: हाथी पांव के नाम से जाना जाता है। यह लटकते हुए अंगों में होता है और इससे मनुष्य में स्थायी अपंगता हो जाती है। ऐसे में सरकार की ओर से वर्ष में एक बार मुफ्त दी जाने वाली दवा डीईसी व एल्बेंडाजोल की गोली जरूर खानी चाहिए। इसके खाने से इस बीमारी से बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि 22 नवंबर से सात दिसंबर तक जिले में फाइलेरिया मुक्ति अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य टीम घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोग की दवा डीईसी व एल्बेंडाजोल की गोली खिलाएंगी। डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खानी है। एल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खानी है। बताया कि जिस व्यक्ति में फाइलेरिया के कीटाणु होंगे। उन्हें यह दवा खाने से चक्कर आ सकता है, लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नराराण श्रीवास्तव ने बताया कि फाइलेरिया मुक्ति अभियान में 1838598 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके लिए जिले में 1727 टीमें बनाई गई हैं। ब्लॉक स्तर पर 342 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं और नौ टीमें ऐसी बनी है जो मानिटरिंग व सुपर विजन का काम करेंगी। इसमें अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी शामिल है। बताया कि इस अभियान में सोमवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार को सभी लोगों को टीम द्वारा दवा खिलाने का काम किया जाएगा, जबकि बुधवार एवं शनिवार को छूटे हुए लोगों को दवा खिलाई जाएगी।
ये लोग नहीं खा सकते दवा
एसीएमओ डॉ. आरजी यादव ने बताया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों को यह दवा नहीं खिलाई जाएगी। जबकि पांच साल के बच्चों को डीईसी की एक व एल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाएगी। छह वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली और एल्बेंडाजोल की एक गोली और 15 वर्ष व इसके ऊपर के बड़े लोगों को डीईसी की तीन गोली व एल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाएगी।