सराफा कारोबारियों की हड़ताल की मार इस व्यवसाय के कारीगरों की गृहस्थी पर पड़ने लगी है। रोजाना आभूषण बनाने का आर्डर लेकर घर का खर्च चलाने वाले कारीगरों की स्थिति आज बाजार से कर्ज लेने की आ गई है। छोटे सराफा व्यवसायियों की हालत भी यही है। संगठन की कड़ी हिदायत के चलते आर्डर नहीं ले पा रहे हैं।
दूकानें बंद होने से मजदूरों के घर की खुशहाली लौट गई है। आमदनी बंद होने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है, दवा के लिए उधार मांगने तक की नौबत आ गई है। ज्वेलर्स के वहां कारीगरी करने वाले पप्पू के बेटे को मंगलवार की रात निमोनिया हो गया है। रात में हालत ज्यादा खराब हुई तो पप्पू बेटे को लेकर सेठ के घर पहुंचा। बीमारी की दुहाई देकर एक हजार रुपये उधार लेना पड़ा। यह हाल किसी एक कामगार का नहीं, बल्कि सराफा व्यापार से जुड़े हर कामगारों का है।
इन कामगारों की गृहस्थी पूरी तरह से कर्ज पर चल रही है। सराफा व्यवसाय पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के विरोध में सराफा कारोबारी पिछले करीब एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं। जेवरों की दूकानें पूरी तरह से बंद हैं। व्यवसायी कभी जुलूस निकालकर, कभी धरना देकर तो कभी चाय, फल, सब्जी आदि बेचकर केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं। इस बीच सबसे ज्यादा विपरीत स्थिति कामगारों की है।
कामगार कहते हैं कि उन्हें गृहस्थी चलाने के लिए सराफा कारोबारियों से कर्ज लेना पड़ रहा है। कारीगर पप्पू, संतोष, हनुमान, नंदलाल और काशी कहते हैं कि जब से सराफा की दूकानें बंद हैं, उनके घर से खुशहाली लौट गई है। घर में खाना बनाने तक के लिए पैसे नहीं हैं।