सोनभद्र। चालक शारदा प्रसाद चौबे की हत्या कर बोलेराे लूटने के मामले में 19 वर्ष नौ महीने बाद बड़ा फैसला आया है। शुक्रवार को अदालत ने दोषी चतरा ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि (प्रमुख के जेठ) धीरेंद्र पटेल सहित दो लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू अर्चना रानी की अदालत ने एक-एक लाख जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की राशि से 1.05 लाख रुपये पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे।
अभियोजन के मुताबिक 22 फरवरी 2006 को यतींद्र सिंह यादव निवासी मैनपुर, थाना करगंडा, गाजीपुर ने राबर्ट्सगंज कोतवाली में तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम पंजीकृत बोलेरो 18 फरवरी को पुलिस लाइन में तैनात उनके बहनोई के पास था। शारदा प्रसाद चौबे, निवासी लेबर काॅलोनी चुर्क, थाना रॉबर्ट्सगंज वाहन को चला रहा था।
उसी दिन शाम पांच बजे सवेरा होटल के पास से राजेश सिंह निवासी मंगरहथा, थाना पन्नूगंज ने अपनी बहन की विदाई कराने के लिए वाराणसी चलने को कहा। शारदा उसके साथ वाहन लेकर चला गया। जब 19 फरवरी को चालक वाहन लेकर नहीं लौटा तो उसकी तलाश शुरू की गई। 21 फरवरी को पता चला कि राजेश सिंह, बबलू यादव व एक अन्य व्यक्ति उसे लेकर गए थे।
22 फरवरी को गाजीपुर में शव मिलने की खबर छपी। उसकी शिनाख्त शारदा प्रसाद चौबे के रूप में हुई। प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने जांच की तो चालक की हत्या कर लूटी गई बोलेरो धीरेंद्र पटेल के कब्जे से बरामद हुई। उस वक्त आरोपी बबलू नाबालिग था, जिस कारण उसकी फाइल किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई थी।
धीरेंद्र और राजेश के खिलाफ अदालत में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने 21 नवंबर को दोनों को दोषी करार दिया था। शुक्रवार को अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
शासकीय अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि दोनों दोषियों को धारा 302 आईपीसी के अपराध के लिए आजीवन कारावास, 40-40 हजार अर्थदंड, धारा 394 आईपीसी के अपराध के लिए आजीवन कारावास, 40-40 हजार अर्थदंड, धारा 201 आईपीसी के अपराध के लिए पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास, 15-15 हजार अर्थदंड, धारा 411 आईपीसी के अपराध के लिए तीन-तीन वर्ष सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।