सोनभद्र। ओबरा क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी स्थित मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की पत्थर खदान में चट्टान धंसकने से मलबे के नीचे दबे 6 और शव सोमवार को 36 घंटे बाद निकाले गए। इसमें दो सगे भाइयों के शव भी शामिल हैं। हादसे में मरने वालों की संख्या अब सात हो गई है।
इनकी पहचान पनारी गांव के करमसार टोला निवासी इंद्रजीत यादव (32), उसके भाई संतोष यादव (30), कोन के पिपरखाड़ गांव के परसवा निवासी रविंद्र उर्फ नानक और पनारी के खड़री टोला निवासी रामखेलावन (40), ग्राम परसोई के टोला जकहवा निवासी गुलाब उर्फ मुंशी के रूप में हुई। छठे शव की शिनाख्त नहीं हो पाई। सभी शवों का जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया।
दोपहर करीब एक बजे जिले के प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां मृतक मजदूरों के परिजनों से शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में मृत सभी मजदूरों के परिजनों को 20.55-20.55 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि विभिन्न माध्यमों से दी जाएगी।
मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि हादसे की जांच तीन स्तरीय समिति करेगी। इसमें पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग की टीमें लापरवाही सहित अन्य बिंदुओं पर जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। घटना में जिसकी भी संलिप्तता होगी, वह बख्शा नहीं जाएगा, चाहे किसी भी दल या पद पर हो। कार्रवाई ऐसी होगी, जो नजीर बनेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जीरो टालरेंस नीति के रूप में कार्य हो रहा है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई तय है।
डीएम बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि रविवार की रात करीब 2 बजे अमरेनिया निवासी राजू गोंड का शव मिला था। पनारी के करमसार टोला निवासी कृपाशंकर (32) अभी लापता हैं। बचाव दल उनकी तलाश में जुटा है। रेस्क्यू ऑपरेशन तब तक चलता रहेगा, जब तक यह संतुष्टि नहीं हो जाती कि अंदर अन्य कोई दबा नहीं है।
शनिवार की दोपहर बाद खदान में ड्रिलिंग के दौरान चट्टान गिरने से मजदूर मलबे में दब गए थे। इनकी संख्या 15 बताई जा रही है। घटना के बाद से पुलिस-प्रशासन की निगरानी में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीम पिछली 48 घंटे से राहत कार्य में जुटी हुई है।
सुबह पांच बजे तक चार शव मलबे से निकाले गए, जबकि शाम करीब आठ बजे दो शव और मिले।