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Sonebhadra News: खुले में फेंका जा रहा बाॅयो मेडिकल कचरा

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सोनभद्र। जिले के अस्पतालों, पैथोलॉजी व एक्स-रे स्टोर से निकले वाला मेडिकल वेस्ट सड़कों के किनारे और खुले मैदानों में फेंका जा रहा है। कई स्थानों पर इसे जलाया भी जाता है। जिम्मेदार स्वास्थ्य व प्रदूषण विभाग के अधिकारी इस मनमानी पर मौन हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ रहा है।
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जिले में जिला अस्पताल, दस सीएचसी, करीब 40 पीएचसी, सौ के करीब निजी अस्पताल, क्लीनिक, डेढ़ सौ से अधिक पंजीकृत और गैर पंजीकृत पैथालॉजी सेंटर, एक्सरे सेंटर संचालित हैं। इन स्थानों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल (खून, केमिकल्स से भींगे कॉटन-पट्टी से लेकर सीरिंज, दवाओं के रैपर) के निस्तारण में लापरवाही बरती जा रही है। इन्हें खुले मैदानों व सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है। कुछ सेंटर तो इस मेडिकल वेस्ट को जलाकर पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहे हैं। बावजूद स्वास्थ्य विभाग के साथ ही प्रदूषण विभाग के आला अधिकारी उदासीन बने हुए हैं। शासन के नियमानुसार अगर कोई नर्सिंग होम, अस्पताल या क्लीनिक इन नियमों का पालन नहीं करता है तो जुर्माने के साथ ही उसकी मान्यता व लाइसेंस निरस्त करने तक का प्रावधान है।
देते हैं प्रमाण पत्र, पर नहीं है कोई जानकारी

जिले में बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर हो रही लापरवाही में बड़ी भूमिका प्रदूषण विभाग की भी है। इनके अधिकारी बिना मौके की वस्तु स्थिति को परखे मानक को दरकिनार कर संबंधितों को प्रमाण पत्र जारी करते हैं। नियमों के उल्लंघन पर चुप्पी साध लेते हैं। पिछले एक साल में कार्रवाई के विवरण के संबंध में विभाग के अधिकारियों को कुछ जानकारी नहीं है। जिले में कितने अस्पताल व इनसे संबंधित सेंटर को प्रमाण पत्र जारी किया गया और कितने के पास बायो मेडिकल उठान की व्यवस्था है और किसे नोटिस दिया गया, इसका कोई ब्योरा विभाग के पास नहीं है। इस संबंध में उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी यूके गुप्ता का कहना था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। यह मामला अभय देखते हैं। नोडल अभय ने इस तरह का कोई डाटा होने से इन्कार किया है।
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जिम्मेदार ही फैला रहे संक्रमण

पड़ताल के दौरान सीएचसी घोरावल में बाॅयो मेडिकल वेस्ट निस्तारण में लापरवाही मिली। पहले यहां मेडिकल वेस्ट जलता था। अब परिसर में पानी से भरे बड़े-बड़े गड्ढों में फेंका जा रहा है। पूर्व में फेंका गया कचरा भी बजबजा रहा है। बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण कक्ष दो से चार फीट ऊंची घास और झंखाड़ से पटा मिला।

नोटिस का असर नहीं
जिला अस्पताल में मांस के टुकड़े, खून से सने कपड़े, सीरिंज, प्लास्टिक और सीसी की बोतलें फेंकी जा रही हैं। यहां करीब 15 क्विंटल कचरा बजबजा रहा है, जबकि पूर्व में नोटिस भी मिल चुका है। अस्पताल के दवा भंडारण के सामने भी दवाएं और इंजेक्शन आग के हवाले किए गए थे। ब्लॉक पीएचसी केकराही और चतरा में भी मेडिकल कचरे को बॉक्स के बजाय खुले में फेंका जा रहा है।

सीएमओ कार्यालय में जलाई गई दवा
अस्पतालों की निगरानी की भूमिका निभाने वाला सीएमओ कार्यालय ही लापरवाही कर रहा है। शुक्रवार को कार्यालय परिसर में एक्सपायर दवाएं जली पाई गईं, जबकि दवाओं को जलाने का नियम नहीं है। सीएचसी शाहगंज में भी काफी संख्या में बायो मेडिकल कचरा जलाया गया था। पीएचसी परासी पर भी स्थिति यही रही।
जानलेवा बीमारी का खतरा

लोगों की सेहत सुधारने वाले अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट जलाने और खुले में फेंकने से बीमारियां फैलने का खतरा है। शरीर के अंग, खून, दूषित रुई, पट्टी, ब्लड बैग, सीरिंज, आइवी सेट, ट्यूब, कांच की बोतल व स्लाइड फेंके जाने से हेपेटाइटिस बी, संक्रमण से फैलने वाली बीमारियां, टिटनेस, कूड़ा खाने से कुत्ते पागल हो सकते हैं। कूड़े के पानी में या धूप में पड़े रहने से संक्रमण फैलता है। बायो मेडिकल वेस्ट के जलने पर निकलने वाले धुएं से कई बीमारियां हो सकती हैं।

संगम और सीपीसी भी लापरवाह
जिले में सरकारी अस्पतालों से मेडिकल कचरे के निस्तारण और उठान की जिम्मेदारी संगम मेडिसर्स की है। इसके लिए एनएचएम के तहत लाखों का भुगतान होता है। निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी सीपीसी की है। इसके पास संसाधनों के अभाव और इनके वाहनों के कभी कभार आने की वजह से भी ऐसी ही स्थिति बन रही है।

बाॅयो मेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण के लिए संगम मेडिसर्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है। संस्था ही अस्पतालों से कचरा उठाकर निस्तारण के लिए ले जाना है। सीएचसी अधीक्षकों को समय-समय पर निर्देश दिए जाते रहे हैं। अगर कहीं लापरवाही है तो निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सुमन, नोडल अधिकारी, बायो मेडिकल वेस्ट।
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