प्राचीन बेलन नदी के अस्तित्व को फिर से स्थापित करने की कवायद शुरू हुई है। मनरेगा के माध्यम से इसका पुनरोद्धार किया जाएगा। नदी के प्राकृतिक बहाव मार्ग पर अतिक्रमण हटाने के साथ ही खोदाई कराई जाएगी, जिससे इसकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ सके।
बुधवार को डीसी मनरेगा रवींद्र वीर ने बेलन नदी के उद्गम स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया। प्राचीन बेलन नदी का जिक्र ऐतिहासिक पुस्तकों में भी है। नदी के आसपास की गई पुरातात्विक खुदाई में उच्च पाषाण युग के अवशेष पाए गए हैं।
कार्बन डेटिंग से जिनके लगभग 17 हजार वर्ष पुराने होने का अनुमान लगाया गया है। भारत की प्राचीन सभ्यताओं में से एक बेलन घाटी सभ्यता भी रही है, जो बेलन नदी के आसपास ही विकसित हुई।
चतरा ब्लॉक के गुल्लीडाढ़ ग्राम पंचायत के करद गांव को बेलन नदी का उद्गम स्थल माना गया है। यह नदी सोनभद्र से मिर्जापुर होते हुए प्रयागराज में जाकर टोंस में मिल जाती है। अतिक्रमण व उपेक्षा के चलते नदी का उद्गम स्थल काफी सिकुड़ चुका है।
इसे देखकर यह बता माना मुश्किल है कि यहां से कोई नदी भी निकलती है। ठीक ऐसी ही स्थिति नदी के किनारों की भी है। देखरेख व संरक्षण के अभाव में किनारों पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है।
तेज बारिश के बाद नदी उफनाती है तो इसका रौद्र रूप तटवर्ती इलाकों में काफी तबाही भी मचाता है। वर्षों से इसके संरक्षण की मांग उठती रही है। करीब तीन वर्ष पहले सदर विधायक भूपेश चौबे ने बेलन नदी को पुनर्जीवित करने के लिए पदयात्रा भी निकाली थी, लेकिन उस पर कोई प्रगति नहीं हुई।
अब इसे फिर से सुदृढ़ करने की कवायद शुरू हुई है। मनरेगा के माध्यम से इस पर काम कराया जाएगा। इसके लिए बुधवार को डीसी मनरेगा ने करद गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान प्रधान लालबहादुर ने बताया कि उद्गम स्थल पर बेलन नदी के बहाव का रास्ता अब अस्तित्व में नहीं है। इसे लोगों ने कब्जा कर लिया है। यही स्थिति आगे नदी के प्रवाह मार्ग की भी है। उनके साथ ब्लाक कोआर्डिनेटर सुनील कुमार भी मौजूद रहे।
शासन के निर्देश पर बेलन नदी के उद्गम स्थल एवं इसके अस्तित्व को पुन: स्थापित किया जाना है। नदी के किनारों पर अतिक्रमण के संबंध में डीएम से मिलकर अवगत कराया जाएगा। राजस्व विभाग की टीम की तरफ से इसकी नाप कर अवैध कब्जे को खाली कराकर मनरेगा से इसकी खोदाई कराई जाएगी।
-रवींद्र वीर सिंह, डीसी मनरेगा।