जिले में सड़कों पर रहने एवं भीख मांगने वाले बच्चों को चिन्हित कर उनके पुनर्वास की व्यवस्था करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। अभियान चलाकर बाल संरक्षण समेत अन्य इकाइयां ऐसे बच्चों को चिन्हित कर रही हैं। उन्हें पांच फरवरी तक सूचनाएं स्वराज पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
उत्तर प्रदेश शासन की प्रमुख सचिव अनीता सी मेश्राम ने समस्त अध्यक्ष बाल कल्याण समिति को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जनपद में ऐसे बच्चों का चिन्हांकन करें जो सड़कों के किनारे रहते एवं घूमते हैं। जिनके अभिभावक नहीं हैं और अगर हैं भी तो किस कारण बच्चे सड़क पर घूम रहे हैं, बच्चे से उसकी परेशानी एवं पता अभिभावक के बारे में अवश्य पूछें। सही जानकारी न मिल पाने की स्थिति में सीडब्ल्यूसी को भेज दें। चिन्हांकन के बाद बच्चों का डाटा तैयार करें। बच्चों के विवरण की पहचान, बच्चे की सामाजिक पृष्टभूमि, बच्चे की व्यक्तिगत देखरेख योजना, बाल कल्याण समिति सीडब्ल्यूसी के आदेश को अपलोड किया जाना है। इसके अलावा जिन योजनाओं व लाभों को बच्चे परिवार या अभिभावक से जोड़ा जाना आदि की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नारायण देव पांडेय ने बताया कि मानव तस्कर इकाई, बाल संरक्षण इकाई, किशोर पुलिस इकाई और श्रम विभाग सड़कों के किनारे रहने, घूमने और भिक्षाटन करने वाले बच्चों को चिन्हित कर रहा है। डोर-टू-डोर अभियान चलाकर चिन्हिकरण का कार्य किया जा रहा है। कहा कि पांच फरवरी तक बच्चों का चिन्हाकंन कर सूचना राष्ट्रीय बाल अधिकार एवं संरक्षण आयोग द्वारा विकसित बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा।