फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला अभियान स्वास्थ्य : सबका मिला सहयोग तो टीकाकरण पहुंचा लक्ष्य की ओर

विज्ञापन
विज्ञापन
सोनभद्र। कोरोना टीकाकरण को शुरू हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। 12 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को क्रमवार इस अभियान में जोड़ा गया है। शुरुआत में लोग टीका लगवाने से डरते-झिझकते रहे लेकिन सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने टीके के प्रति भ्रांतियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाई। इसी का असर है कि टीकाकरण अभियान तेजी से लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। 15 से अधिक आयु वर्ग वाले अधिकांश लोग खुद को प्रतिरक्षित कर चुके हैं। उनसे प्रेरित होकर 12-14 वर्ष की आयु वाले किशोर भी अपना टीकाकरण तेजी से करा रहे हैं।
विज्ञापन

गत वर्ष जनवरी से शुरु हुए टीकाकरण अभियान में पहले हेल्थ वर्कर, फ्रंट लाइन वर्कर्स, बुजुर्ग और फिर 18 वर्ष से अधिक आयु वालों को जोड़ा गया। इस वर्ग के ज्यादातर लोगों के टीका लगवाने के बाद जब इसी साल तीन जनवरी से 15-17 वर्ष की आयु वालों का टीकाकरण शुरू किया गया तब तमाम तरह की भ्रांतियां फैलाई गईं। इसका असर रहा कि अभिभावक अपने बच्चों को टीका लगवाने में हिचकते रहे। बाद में सामाजिक, धार्मिक संगठनों व शिक्षण संस्थाओं ने लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। उनके आगे आने के बाद न सिर्फ डर दूर हुआ बल्कि टीकाकरण को भी रफ्तार मिली। 15-17 वर्ष के कुल 130665 किशोरों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 117395 को टीका लगाया जा चुका है। वहीं 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग वालों का टीकाकरण भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। परीक्षाओं के बावजूद किशोर टीका लगवाने पहुंच रहे हैं।
खत्म हुई हैं भ्रांतियां
जिला संयुक्त चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिसियन डॉ. एसएस पांडेय ने बताया कि शुरुआती दिनों में कोरोना टीका के प्रति लोगों में थोड़ा भय का माहौल रहा। कुछ ऐसे भी लोग रहे, जो इसे लेकर फोबिया के शिकार रहे। मगर समय-समय पर चिकित्सकों, सामाजिक संगठनों की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया गया। सभी के सहयोग से ही टीकाकरण अभियान में तेजी आई। टीके से डरने की आवश्यकता नहीं है। लोगों को कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अनिवार्य रूप कराना चाहिए।
विज्ञापन

कोरोना का टीका सभी लगवाएं इसके लिए लोगों को जगह-जगह बैठक करके जागरूक किया जाता रहा है। कोरोना का टीका सभी जाति-धर्म के लोगों को लगवाना चाहिए। यह पूर्ण रूप से सुरक्षित है। इससे कोई भी परेशानी नहीं होती। पूर्व में कोरोना टीका के प्रति जागरूक करने के लिए मुहिम भी चलाई गई थी, जिसका लाभ भी हुआ। - जंगलीदास महाराज, उर्फ भिखरी बाबा।
अभिभावकों को लगातार खुद के साथ ही 12 से 17 वर्ष के बच्चों को टीकाकरण लगवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। टीका पूर्ण रूप से सुरक्षित है। बच्चे कोरोना जैसी घातक बीमारी से सुरक्षित रहे। इसके लिए हम सभी का यह फर्ज है कि बच्चों को टीका लगवाने में सहयोग करें। - फादर लैंसी, सेंट जेवियर्स चर्च राबर्ट्सगंज।
कोरोना कोई धर्म-मजहब नहीं देखता है। कोरोना के टीकाकरण के लिए सभी को समय-समय पर जागरूक किया जा रहा है। सभी से अपील है कि वे अपने परिवार के हर एक सदस्य को टीका लगवाएं। बच्चे भी इससे डरे नहीं। इससे कोई नुकसान नहीं है। - मुश्ताक अहमद, सदर अंजुमन इस्लामिया कमेटी।
हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि कोरोना का टीका लगवाएं। टीका ही कोरोना संक्रमण से बचा सकता है। यहीं वह हथियार है, जिससे कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकती है। - सरदार जसवीर सिंह।
संगठन की ओर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हुए लोगों को कोरोना के टीका करण का लाभ बताया जाता रहा है। वहीं बच्चों को भी टीका के लिए आगे आने की अपील की जाती रही है। सभी अभिभावकों से आग्रह है कि वे बच्चों के हित को देखते हुए उन्हें टीका अवश्य लगवाएं। - किशोरी सिंह, अध्यक्ष लायंस क्लब।
कोरोना से टीके को लेकर तरह-तरह का डर फैलाया गया। मगर ऐेसा हकिकत में नहीं हैं। मैंने एक माह पूर्व कोरोना का टीका लगवाया। किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई। सभी को कोरोना का टीका लेना चाहिए। - अंजू सिंह चौहान, मारकुंडी।
मैंने दो माह पूर्व कोरोना का टीका लगवाया। ऐसा लगा जैसे कि कोरोना से लड़ाई में एक बड़ा हथियार मिल गया। सभी भाईयों-बहनों से अपील है कि वे भी टीका केंद्र पर जा कर अपना टीका करण अवश्य कराएं। - कुमकुम, नई बाजार।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें