राबर्ट्सगंज में राम सरोवर तालाब पर छठ पूजा स्थल की पोताई कराते नगरपालिका अध्यक्ष वीरेंद्र जायसवाल।
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सोनभद्र। संतति कामना वाले और शरीर, मन और आत्मा के शुद्धि के लिए महापर्व छठ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नहाय-खाय के साथ रविवार को सूर्योपासना के इस चार दिवसीय महापर्व की शुरुआत कर दी गई। सोमवार को खरना की रस्म निभाकर 36 घंटे के कठिन व्रत की शुरुआत कर दी जाएगी।
13 नवंबर की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 14 नवंबर की सुबह उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन किया जाएगा। बिहार-झारखंड से सटे होने के कारण जिले में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह बना रहता है।
वहीं रविवार को व्रती महिलाओं ने शुद्धता के साथ नदियों, सरोवरों, जलाशयों में स्नान किया। इसके बाद चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी का सेवन करके महापर्व छठ का शुभारंभ किया। डॉ. शिवकुमार शास्त्री ने बताया कि सोमवार को दूसरे दिन व्रती पूरे दिन निर्जला रहकर शाम को सूर्यास्त होने के बाद पूजा करके खरना (खीर और रोटी) का प्रसाद ग्रहण करेंगे।
इसके बाद सूर्य को 13 नवंबर को सायंकालीन, 14 नवंबर को प्रात: कालीन अर्घ्य देने के लिए 36 घंटे के कठिन व्रत की शुरुआत बताया जाएगा। उनके मुताबिक इस बार के चार दिवसीय महापर्व छठ में ग्रह-गोचरों का शुभ संयोग बन रहा है, जो काफी फलदायक है।
उन्होंने बताया कि सायंकालीन अर्घ्य के समय अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है। जबकि प्रात:कालीन अर्घ्य के समय छत्र योग का संयोग मिल रहा है। पीतल और तांबे के पात्र से सूर्य भगवान को अर्घ्य दें। पीतल के पात्र से दूध का अर्घ्य देना सर्वोत्तम रहेगा। तांबे के पात्र में दूध का अर्घ्य ना दें।