अगले दिन जब फोन नहीं उठा तो परिजन ओबरा पहुंचे। कमरे पर ताला लगा था और अंदर मोबाइल, स्मार्ट वॉच समेत सारा सामान जस का तस रखा मिला। 15 दिसंबर को पुलिस को सूचना दी गई। प्रयागराज, वाराणसी से लेकर दिल्ली तक तलाश की गई, लेकिन अमन का कोई सुराग नहीं मिला। मां शांति देवी की आंखें आज भी बेटे की याद में नम हो जाती हैं।
वह कहती हैं कि काश उस दिन कुछ और देर बात कर ली होती, तो शायद उनका बेटा आज उनके साथ होता। पिता को भी यही मलाल है कि एक बार बात हो जाती तो हालात कुछ और होते।
बड़े भाई अमित के अनुसार, चोरी के एक मोबाइल को लेकर अमन पर दबाव बनाया जा रहा था, जिसके कारण उसने पैसे जुटाने की कोशिश की थी। हालांकि इस दिशा में भी पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला। हाल ही में लापता बच्चों को ढूंढने के लिए चल रही मुहिम से परिवार की उम्मीद फिर जागी है।