सोनभद्र। नक्सल प्रभावित सोनांचल में प्राथमिक शिक्षा हाशिए पर है। यहां गुरु जी के अभाव में बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है। अधिकांश प्राथमिक विद्यालय शिक्षामित्रों के सहारे हैं तो कई उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सौ बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक अध्यापक है। ऐसे में यहां बेहतरीन शिक्षा देने की कवायद फेल होती दिखती है।
सोनांचल के 501 ग्राम पंचायतों में 273 ग्राम पंचायत अति नक्सल प्रभावित हैं। जनपद में 356 प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना की गई है, जबकि 159 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों को शिक्षा की रोशनी देने के लिए प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय ही प्रमुख केंद्र हैं। जनपद के 356 प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को शिक्षित करने के लिए मात्र 268 शिक्षक ही है, जो स्कूल के सापेक्ष 112 कम है। जबकि अधिकांश विद्यालय शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं। जनपद में शिक्षामित्रों की संख्या 440 हैं।
प्राथमिक विद्यालयों में बीस हजार से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। एक विद्यालय में औसतन अस्सी बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में एक अध्यापक इतने बच्चों को कैसे संभालेगा यह समझ के परे है। नियमत: एक विद्यालय में दो अध्यापक होने चाहिए, इस तरह देखा जाए तो 444 शिक्षक पद रिक्त चल रहे हैं।
यही हाल पूर्व माध्यमिक विद्यालयों का है। 159 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 198 शिक्षक नियुक्त हैं। यहां अलग-अलग विषय होने के बाद भी एक-एक अध्यापक को पचास से साठ बच्चों को एक साथ पढ़ाना पड़ रहा है। एक ही अध्यापक अलग-अलग कक्षाओं में अलग-अलग विषय एक साथ कैसे पढ़ा सकता है, यह सोचने की फुर्सत शिक्षा विभाग के पास नहीं है। नियमत: पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में तीन शिक्षक होने चाहिए, इस हिसाब से देखे तो यहां 279 शिक्षक पद रिक्त हैं।