ओबरा। भगवान शिव के अज्ञातवास, भगवान राम के बनवास, पांडवों के अज्ञातवास, प्रागैतिहासकालीन सभ्यता से जुड़ाव रखने वाली जिले की गुफा-कंदराएं अपने में कई रहस्य समेटे हुए हैं। इसी में एक है ओबरा के सेक्टर तीन में स्थित गुफा। यहां की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित और भूतेश्वर दरबार के नाम से पहचाने जाने वाली इस गुफा में महादेव का रहस्यमयी संसार बसा हुआ है। अभी श्रद्धालु इस गुफा में 30 से 35 फीट अंदर तक जाकर दर्शन-पूजन कर रहे हैं। इतने में ही अब तक 50 से अधिक प्राकृतिक शिवलिंग मिल चुके हैं। जैसे-जैसे लोग गुफा के अंदर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे प्राकृतिक शिवलिंगों का अभी भी मिलना जारी है। इसको लेकर जहां रहस्य बना हुआ है। वहीं इसे शिव साधना का केंद्र या नागलोग से जुड़ाव मानते हुए, इस स्थल के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है।
किंवदंती यह भी कि इस गुफा का जुड़ाव सीधे चुनार से है और यहां साधना करने वाले ऋषि-मुनि एवं अन्य लोग प्राचीन काल में आवागमन के लिए इसका उपयोग करते थे। 1965 में ओबरा परियोजना की स्थापना के पूर्व यह स्थल पूरी तरह निर्जन और पहाड़ी इलाका था। परियोजना स्थापना के बाद जब यहां कालोनियां और बस्तियां बसीं तब लोगों को भगवान शिव के इस रहस्यमयी संसार की जानकारी हुई और गुफा को भूतेश्वर महादेव का दरबार मानते हुए पूजन-अर्चन शुरू कर दिया। श्रावण माह में जहां पूरे माह श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहता है। नागपंचमी, बसंत पंचमी और शिवरात्रि को यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शिव-पार्वती विवाह के आयोजन के साथ यहां मांगलिक कार्यक्रम भी होते हैं। मौजूदा समय इस धाम की व्यवस्था महारुद्र सेवा समिति ही देखती है। यहां पर और भी कई छोटे-छोटे मंदिर हैं जिनकी साफ-सफाई सुंदरीकरण का कार्य समिति जनसहयोग के जरिए करती है। पुजारी परमानंद महाराज बताते हैं कि बसंत पंचमी, शिवरात्रि, नागपंचमी और सावन माह में यहां भारी संख्या में लोग भगवान शिव को जल चढ़ाने पहुंचते हैं। आदिवासी अंचलों से भी भक्त देवाधिदेव महादेव के जलाभिषेक के लिए आते हैं। उधर, ओबरा नगर पंचायत अध्यक्ष प्रानमती देवी का कहना था यह स्थल लाखों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। इसको देखते हुए धाम के सुंदरीकरण का निर्णय लिया गया है। जल्द ही सुंदरीकरण कार्य कराकर इसे बड़े धाम के रूप में विकसित किया जाएगा।
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नागों से जुड़ाव के मिलते हैं कई संकेत
ओबरा। ओबरा और आस-पास के इलाकों का पुरातन काल में किसी न किसी रूप में नागों से जुड़ाव का कई संकेत मिलता है। सेक्टर दो स्थित पहाड़ी भी अजीबोगरीब रहस्य समेटे हुए है। उपर से अंडाकार पहाड़ी दिखने वाली जगह में छोटी गुफा से लेटते हुए अंदर पहुंचने पर अंदर मंदिर जैसी जगह मिलती है। इस पहाड़ी के अंदर एक तरफ प्राकृतिक रूप से गणेश दूसरी तरफ नाग की प्राकृतिक आकृति स्पष्ट रूप से उभरी हुई है। इस पर किसी की नजर न पडने से यह जगह अभी गर्मी में चरवाहों की आरामगाह बनी हुई है।