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रोजाना उत्सर्जित हो रही सवा टन लाख राख

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सोनभद्र। एनजीटी की कोर कमेटी द्वारा 2015 और 2017 में किए गए ऑंकलन और लोक विज्ञान संस्थान देहरादून तथा सिंगरौली प्रदूषण वाहिनी के ताजा सर्वे पर यकीं करें तो सोनभद्र-सिंगरौली में स्थापित 21 हजार मेगावाट क्षमता से अधिक बिजली परियोजनाओं से रोजाना सवा से डेढ़ लाख टन राख उत्सर्जित हो रही है। जिसका बड़ा हिस्सा किसी न किसी रूप में रेणुका और सोन नदी तथा इनसे जुड़े रिहंद डैम में जा रहा है। इसके अलावा केमिकल सहित अन्य औद्योगिक अवशिष्ट पहुंच रहे हैं सो अलग। सिंगरौली प्रदूषण वाहिनी का दावा है कि निकलने वाली राख से हर दिन सौ किलो पारा, 1400 किलो आर्सेनिक, 1900 किलो क्रोमियम, 1220 किलो सीसता, 30 हजार किलो फ्लोराइड यहां के हवा, मिट्टी और पानी में घुल रहा है। जलीय जीवन पर इसका कितना असर पड़ रहा है, बताने के लिए यह आंकड़े काफी हैं।
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नदियों और अन्य जलस्रोतों में घुलते औद्योगिक अवशिष्ट सीधे तौर पर पानी के अम्लीय-क्षारीय गुण को प्रभावित कर रहे हैं। इससे जलीय जीवन संकट में तो है ही, पौधे, जानवर, इंसान भी इससे सीधे तौर पर प्रभावित हैं। प्रदूषित पानी के सेवन से जानवर और इंसान दोनों के स्कीन, किडनी और लीवर की बीमारी बढ़ रही है।
डा. सुरेश प्रसाद यादव, रसायन विशेषज्ञ

सोनभद्र के विकास की आधार कही जाने वाली रेणुका ओर सोन दोनों नदियों का जलीय जीवन औद्योगिक अवशिष्टों के प्रवाह के चलते तेजी से बिगड़ रहा है। अविलंब प्रभावी कदम नहीं उठे तो गंगा से भी खराब हालत दिखाई देंगे।
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डा. अनिल गौतम, पर्यावरण वैज्ञानिक, देहरादून

सोनभद्र की मिट़्टी, हवा, पानी तीनों प्रदूषित हो चुकी है। औद्योगिक अवशिष्टों के कारण नदियों का जलीय जीवन तेजी से समाप्त हो रहा है। इसको लेकर ठोस पहल की जरूरत है।
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रामेश्वर भाई, संयोजक, सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी
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