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जिले की सबसे पुरानी टाउन एरिया है घोरावल

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घोरावल जिले का सबसे पुराना टाउन एरिया है। वर्ष 1872 में ब्रिटिश शासन में इसे टाउन एरिया का दर्जा दिया गया था। इसके बाद राबर्ट्सगंज को वर्ष 1928 में टाउन एरिया का दर्जा मिला। जबकि राबर्ट्सगंज को सबसे पहले नगर पालिका का दर्जा मिला और यहां 1979 में पहला चुनाव हुआ। इसके बाद एक-एक कर सात अन्य नगर पंचायतें बनीं, जिन पर ज्यादातर भाजपा का कब्जा रहा है। हालांकि निर्दलियों ने भी कई बार अपना वर्चस्व दिखाया और चेयरमैन की कुर्सी पर काबिज हुए।
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पांच अक्तूबर वर्ष 1928 में राबर्ट्सगंज में टाउन एरिया कमेटी स्थापित हुई औैर यहां के सबसे पहले चेयरमैन बद्री नारायण सिंह बने। इसके बाद 21 मार्च 1979 को इसे नगर पालिका का दर्जा मिला। इसके बाद वर्ष 1988 में हुए चुनाव में जितेेंद्र सिंह निर्दल प्रत्याशी के रूप में चेयरमैैन चुने गए। उस वक्त उनका चुनाव चिह्न सूरज था। इसके बाद हुए चुनाव में अजय शेखर जीते और उन्होंने दिसंबर 1995 में कार्यभार ग्रहण किया। अजय शेखर 1977 में टाउन एरिया रहने पर भी चेयरमैन रह चुके हैं। वर्ष 2000 में जितेंद्र सिंह की पत्नी निशा सिंह चेयरमैन का चुनाव जीतीं, फिर 2001 में विजय जैन सपा से और 2012 में भाजपा से कृष्ण मुरारी गुप्ता चेयरमैन बने। घोरावल प्रतिनिधि के अनुसार सन 1872 में ब्रिटिश शासन में घोरावल टाउन एरिया की स्थापना हुई थी। नरसिंह राव प्रधानमंत्री हुए तो घोरावल को नगर पंचायत का दर्जा मिला। 1952 के चुनाव में बनारसी दास ऊमर ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतकर घोरावल का प्रथम चेयरमैन होने का गौरव प्राप्त किया था। 1957 में वे फिर चेयरमैन बने। 1962 के चुनाव में नरसिंह त्रिपाठी चुनाव जीते। 1967 में छह माह के लिए राम प्रसाद ऊमर भी चेयरमैन रहे। 1968-1972 व 1988 में नत्थूलाल अग्रवाल लगातार तीन बार घोरावल टाउन एरिया के चेयरमैन पद का चुनाव जीते। नगर पंचायत के1995 में हुए पहले चुनाव में भाजपा के गोविंददास ऊमर चुनाव जीते। 2000 में सपा की उर्मिला देवी श्रीवास्तव अध्यक्ष बनी। 2006 में भाजपा के राकेश कुमार, 2012 में भाजपा के संजय जायसवाल चेयरमैन बने। 2012 के चुनाव में करीब 5500 मतदाता थे। चुर्क प्रतिनिधि के अनुसार चुर्क-गुर्मा नगर पंचायत 1995 में बना। यहां पहली निर्वाचित चेयरमैन भाजपा की निर्मला सिंह हुई। यहां दो बार सपा और दो बार भाजपा से चेयरमैन बने हैं।
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ओबरा में पहले चेयरमैन रहे हुकुम चंद
ओबरा (ब्यूरो)। नगर पंचायत ओबरा का गठन 1967 में हुआ। 1977 में यह अस्तित्व में आया। 1977 से 1995 तक एसडीएम प्रशासक रहे। नवंबर 1995 में पहली बार चुनाव हुआ। इसमें भाजपा से हुकुम चंद अग्रवाल अध्यक्ष बने। दूसरे और तीसरे पंचवर्षीय में लगातार निर्दल उमाशंकर सिंह विजयी रहे। चौथे पंचवर्षीय में निर्दल दुर्गावती अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। इनका कार्यकाल जुलाई 2017 को समाप्त हुआ। पहले चुनाव के समय 19 वार्ड अस्तित्व में थे जो मौजूदा समय मे 18 हैं। पिछले चुनाव में 20 वार्ड थे। ओबरा सी परियोजना के कारण दो वार्ड कम हुए हैं।
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चोपन में 1988 में हुआ पहले चेयरमैन का चुनाव
चोपन(ब्यूरो)। । नगर पंचायत चोपन का गठन 18 फरवरी 1962 को हुआ था लेकिन पहले चेयरमैन का चुनाव वर्ष 1988 में हुआ। इसमें भाजपा के सुरेश गोयल चेयरमैन निर्वाचित हुआ। तब कुल नौ वार्ड थे। दूसरा 1995 में निर्दल माधुरी देवी तीसरा सपा से विजय अग्रहरि 2000 से 2005 तक, चौथे में शशि गोयल भाजपा से 2011 तक और पांचवें चेयरमैैन इम्तियाज अहमद वर्ष 2012 से अब तक रहे। ------इनसेट------:
ज्ञान प्रभा थीं पिपरी की पहली निर्वाचित चेयरमैैन
रेणुकूट: पिपरी नगर निकाय का गठन 24 मार्च 1958 को हुआ था। तीन दिसंबर 1995 तक यहां प्रशासक के रूप में एसडीएम तैनात रहे। चार दिसंबर 1995 को पहली चेयरमैन ज्ञानप्रभा जैन ने शपथ ली। उस समय हुए चुनाव में यहां कुल 12 वार्ड थे और वोटरों की संख्या करीब नौ हजार थी। वर्ष दो हजार के चुनाव में काशीनाथ सिंह पिपरी के दूसरे चेयरमैन बने। वर्ष 2006 के चुनाव में श्रीमती विमलेश सिंह जीतीं। 2012 में सावित्री सिंह चुनाव जीतीं। तब 10994 वोटर थे। रेणुकूट नगर पंचायत में पहली बार 1995 में चुनाव हुआ। गायत्री देवी चुनाव जीतीं। वर्ष दो हजार में उनका कार्यकाल खत्म हुआ लेकिन औद्योगिक नगर से संबंधित विवाद के चलते मामला कोर्ट मेें चला गया और वर्ष 2006 तक चुनाव नहीं हुआ। वर्ष 2007 में हुए चुनाव में अनिल सिंह जीतें। वर्ष 2013 के चुनाव में भी उन्हें जीत हासिल हुई तब और अब भी 11 वार्ड ही थे।
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दुद्धी में चैयरमैैन पद पर रहा निर्दलियों का कब्जा
दुद्धी। वर्ष 1978 में अस्तित्व में आए नगर पंचायत दुद्धी में चेयरमैन पद पर लगातार निर्दलियों का कब्जा रहा। वर्ष 1988 में यहां पहला चुनाव हुआ और निर्दल गोपाल दास जायसवाल चेयरमैन चुने गए। वर्ष दो हजार में भी उन्हें जीत मिली। 1995 में मंजू जायसवाल, 2007 और वर्ष 2012 में सुनीता कमल चुनाव जीतीं।
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