रेणुकूट। इलाके में परिवहन व्यवस्था के नाम पर मजदूरों और गरीबों के जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। डग्गामार और भारवाहक वाहन ओवरलोड सवारियों को लादकर बेखौफ फर्राटे भर रहे हैं। चंद रुपयों की खातिर परिवहन विभाग और पुलिस के सांठ-गांठ से अवैध डग्गामार वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। दुर्घटना हो जाने के बाद पुलिस लीपापोती में जुट जाती है वहीं आला अफसर जांच का आश्वासन देकर जिम्मेदारियों से इतिश्री कर कर लेते हैं।
नगर में तीन औद्योगिक संस्थाएं हैं, जिसमें कार्य करने के लिए आसपास के इलाके से प्रतिदिन हजारों मजदूर आते हैं। पैसा और पर्याप्त यातायात सुविधा न होने के नाते उन्हें डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। सुबह और शाम के नजारे को देखकर लोगों के होश उड़ जाते हैं जब ठूंस-ठूंस कर सवारियों को भरा जाता है। बीजपुर, म्योरपुर की ओर आने जाने वाली बसों के छतों पर भी यात्री जान जोखिम में डालकर दूरी तय करते हैं। इस रूट पर दर्जनों मालवाहक वाहन सवारियों को ढोने के कार्य में लगाए गये हैं। रेणुकूट परिक्षेत्र में दर्जनों जीप, पिकअप, मैजिक बिना कागजात के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो प्रतिदिन क्षमता से चार गुना अधिक यात्रियों को लाते ले जाते हैं। यही नहीं, प्रतिदिन क्षेत्राधिकारी कार्यालय के सामने से डग्गामार वाहन संचालक बेखौफ होकर सवारियों को चढ़ाते उतारते हैं। पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर स्थापित अवैध स्टैंड से इन वाहनों का संचालन किया जा रहा है। डग्गामार वाहनों के कारण नगर में आए दिन जाम की समस्या बनी रहती है तो वहीं इनके चपेट में आने से पैदल राहगीर और दो पहिया सवार घायल होते हैं। उधर एआरटीओ एसपी सिंह का कहना है कि जब वे जांच करने के लिए जाते हैं तो ओवरलोड और डग्गामार वाहन नहीं मिलते। यदि पहले से लोकेेशन मिल जाए तो ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जा सकेगी। फिर भी वे जांच कर कार्रवाई करेंगे।