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चुआंड़ के प्रदूषित पानी से प्यास बुझा रहे ग्रामीण

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जिले में तपिश बढ़ने के साथ ही पानी की किल्लत में भी इजाफा हो रहा है। नगरीय इलाकों में लोगों को किसी तरह शुद्घ पानी मुहैया हो रहा लेकिन ग्रामीण इलाकों के हालात बदतर हैं। कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां न हैंडपंप काम कर रहे और न ही टैंकरों से पानी की आपूर्ति हो रहे। इससे लोग चुआंड़ का प्रदूषित पानी पीने के लिए विवश हैं। उधर राबर्ट्सगंज रेलवे स्टेशन का हैंडपंप भी खराब होने से लोग परेशान हैं।
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नगवां ब्लॉक के पहाड़ी गांव बड़ैला में पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। यहां आम लोगों के साथ ही मवेशी भी दो बूंद पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। हैंडपंपों के जवाब देने से गांव के चेरो बस्ती के लोग करीब एक किमी दूर दक्षिण की ओर स्थित चुआंड़ से पानी ला रहे हैं। वही प्रदूषित पानी से कपड़ा धो रहे और उसे ही पी रहे हैं। ऐसे में यदि क्षेत्र के लोग विभिन्न तरह की बीमारियों के शिकार हों तो शायद बड़ी बात नहीं होगी। मंगलवार को चुआंड़ से पानी भर रही महिला ने बताया कि गांव के प्राथमिक स्कूल का महज एक हैंडपंप ही चालू है।
यहां दिन में पानी लेने के लिए ग्रामीणों की भीड़ हो जाती है। अब वह हैंडपंप भी पानी छोडने लगा है। आदिवासी वनवासी गांव बड़ैला में पेयजल के संकट की समस्या क्षेत्रीय लोगों ने कई बार उच्चाधिकारियों के समक्ष रखी लेकिन अब तक उसका समाधान नहीं हो सका है। उधर खोड़ैला ग्राम पंचायत की प्रधान निर्मला देवी का कहना है कि गांव में पानी का गंभीर संकट है। गांव में कुल 52 हैंडपंप हैं, जिसमें से 32 हैंडपंप खराब पड़े हैं। महज 20 हैंडपंप ही सही हैं, लेकिन उनमें से भी कम पानी निकल रहा है। गंदा और लाल पानी हैंडपंपों से निकल रहा है। मई, जून की गर्मी में ज्यादातर हैंडपंप पानी देना छोड़ सकते हैं। गांव में एक टैंकर ही चल रहा है, जिससे पूरी आबादी को पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी खोड़ैला के प्राथमिक विद्यालय में लगे निजी सबमर्सिबल, जेनरेटर से पानी निकालकर टैंकर से गांव में आपूर्ति हो रही है।
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