सोनभद्र। शासन ने रबी सीजन में जिले को 9100 मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक का लक्ष्य दिया है। लक्ष्य के सापेक्ष साढ़े नौ हजार एमटी डीएपी पहुंच भी गई है। लेकिन कई साधन सहकारी समितियों के सचिवों की लापरवाही से किसानों को डीएपी नहीं मिल रही है। इससे किसानों को निजी दुकानों पर महंगे दर पर डीएपी क्रय करना पड़ रहा है। जबकि एआर काओपरेटिव सचिवों को जरूरत के अनुसार डीएपी उर्वरक ले जाने कई बार निर्देश दे चुके है।
जानकारी के अनुसार जिले में 62 साधन सहकारी समिति संचालित हो रही है। इसमें जिला सहकारी फेडरेशन की एक, क्रय विक्रय की दो समिति शामिल है। इनमें 52 समिति लाभ में चल रही है। नुकसान में दस समिति है। समिति पर किसानों की संख्या करीब एक लाख है। समितियों पर सक्रिय सदस्यों की संख्या लगभग 39 हजार है। रबी का सीजन शुरू हो गया है। किसान मसूर, चना समेत अन्य फसलों की बुआई करने में जुट गए है। बुआई के वक्त डीएपी की जरूरत होती है। लेकिन करमा, पापी समेत कई समितियों पर किसानों को डीएपी उर्वरक नहीं मिल रहा है। यह हाल तब है जब जिले में पर्याप्त डीएपी रखी हुई है। एआरकापरेटिव त्रिभुवन नारायण सिंह ने कहा कि रबी के लिए करीब 9100 एमटी डीएपी का लक्ष्य है, लेकिन वर्तमान में साढ़े नौ हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद रखी हुई है। सभी समितियों के सचिवों को जरूरत के अनुसार डीएपी ले जाकर किसानों को उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है। कहा कि जो सचिव डीएपी नहीं ले जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखापढ़ी की जाएगी। जिले में डीएपी की कमी नहीं है।