सोनभद्र। विभिन्न मसलों को लेकर लोगों में खासी नाराजगी के बावजूद मोदी मैजिक ने ऐसा असर डाला कि स्थानीय मुद्दे हवा हो गए। वोटिंग के दिन भी तमाम लोग उन मसलों को लेकर नाराजगी जताते रहे लेकिन इवीएम बटन दबाने की बारी आई तो राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता को पहली प्राथमिकता मानते हुए मोदी के नाम पर बटन दबाते चले गए।
2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी लोगों पर मोदी मैजिक का असर था, वोटिंग के रूप में सामने आया भी लेकिन 2019 में स्थिति अलग मानी जा रही थी। केंद्र सरकार के पांच साल और प्रदेश सरकार के दो साल के कार्यकाल के बावजूद विकास कार्य की धीमी रफ्तार से लोग नाराज थे। गिट्टी-बालू के आसमान छूते दाम, समस्याओं को लेकर अफसरों की अनदेखी, तेलगुड़वा-कोन मार्ग, सहित कई प्रमुख सड़कों की खराब हालत, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, जब-तब सामने आते अंतर्विरोध को देखते हुए यह माना जा रहा था कि इस बार महागठबंधन से भाजपा या उसके सहयोगी दल को कड़ी टक्कर मिलने वाली है।
मोदी की राबटर्सगंज में 11 मई को हुई सभा से पहले यह दिख भी रहा था लेकिन सभा के दिन जिस तरह सभा स्थल पर तीखी धूप के बावजूद खुले आसमान के नीचे लोगों की भीड़ उमड़ी और पीएम मोदी ने खुद की जाति गरीब की जाति बताते हुए हमला बोला, उससे यह लगने लगा था कि यहां फिर से जीत मिल सकती है। 19 मई को हुई वोटिंग ने भी इसका संकेत दे दिया था। 23 मई को जब परिणाम आया तो स्पष्ट हो गया कि मोदी मैजिक ने सारे अनुमानों, आंकड़ों, मुद्दों को ध्वस्त कर दिया है।