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अब ग्राम प्रधानों को टैंकरों से पेयजलापूर्ति का देना होगा हिसाब 19-05-32

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सोनभद्र। जिले में तेजी से गिरते भूगर्भ जलस्तर के चलते जंगली एवं पहाड़ी इलाकों के हैंडपंप पानी छोड़ने लगे हैं। इससे पेयजल संकट उत्पन्न होने लगा है। ग्रामीणों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए डीपीआरओ ने प्रधानों को टैंकर क्रय कर आपूर्ति कराने का निर्देश दिया है। प्रधानों को प्रतिदिन कितने टैंकर आपूर्ति किस वार्ड में हुई पर रिपोर्ट तैयार कर सेक्रेटरी को देनी होगी। तब जाकर भुगतान होगा।
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राबटर्सगंज, दुद्धी और घोरावल तहसील क्षेत्र की अधिकांश आबादी पहाड़ी और पठारी इलाकों में बसी हुई है। इस कारण प्रतिवर्ष अप्रैल माह आते-आते पेयजल संकट मुंह बाए खड़ा हो जाता है। इस बार स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब दिखाई दे रही है। स्थिति यह है कि राबटर्सगंज, घोरावल, चतरा, नगवां इलाके के साथ ही चोपन ब्लॉक के रेणुकापार और कोन अंचल, बभनी, दुद्धी, म्योरपुर परिक्षेत्र के साथ ही ऊर्जांचल के भाठ क्षेत्र में बूंद-बूंद पानी के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न होने लगी है। वर्तमान में उरमौरा, लोढ़ी, कमोजी, गोरारी, पुसौली, बढ़ौली, बसुहारी, पोखरिया, चननी, जुगैल, कोटा, रामपुर बरकोनिया, बेलछ, कनछ, चाची, सरईगढ़, माची समेत अन्य गांवों में लगे हैंडपंपों में से अधिकांश ने जवाब दे दिया है।
ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज स्थित हैंडपंपों पर जाना पड़ रहा है। जबकि कई घरों की बोरिंग भी जवाब दे दी है। पेयजल की किल्लत से निपटने के लिए डीपीआरओ ने जिन गांवों में टैंकर नहीं है, वहां के ग्राम प्रधानों को पंचायत निधि से टैंकरों को खरीद कर पेयजलापूर्ति कराने के लिए निर्देशित कर दिया है। कई प्रधानों ने टैंकरों को क्रय भी कर लिया है।
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इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी आरके भारती ने कहा कि ग्राम प्रधानों को प्रतिदिन किस वार्ड में कितनी बार टैंकर से आपूर्ति की गई है पर रिपोर्ट तैयार कर अपने सेक्रेटरी को देना होगा। सेक्रेटरी के माध्यम से रिपोर्ट बीडीओ के पास जाएगी। इसके बाद भुगतान करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। बताया कि अब तक करीब 335 ग्राम सभाओं में नियमानुसार लगभग 400 टैंकरों का क्रय किया जा चुका है। शेष जिन पंचायतों में जरूरत है वहां पर टैंकरों के क्रय करने की प्रक्रिया जारी है।
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इनसेट
पेयजल किल्लत नहीं हुई दूर
सोनभद्र। जिले में पानी का ंसंकट कोई नया मसला नहीं है। वर्षों से यहां तपिश की शुरुआत के साथ ही पेयजल का संकट अभिशाप बन चुका है। इससे निजात के लिए अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हैंडपंपों की स्थापना के साथ ही बढ़ौली-कुसाही समेत कई पेयजल परियोजनाएं भी स्थापित की गई है, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं की स्थिति ठीक न होने से अभी भी पेयजल की समस्या बनी हुई है।
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