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देखेंगे बाल धनुर्धरों का कौशल, करेंगे धनुर्विद्या केंद्र का शुभारंभ

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बभनी। आदिवासी बच्चों का जीवन संवारने में अग्रणी भूमिका निभा रहा सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज चपकी (कारीडांड़) एक जुलाई को धनुर्विद्या और बच्चों में भारतीय संस्कार रोपने को लेकर अनूठी पहल करता नजर आएगा। इस पहल की अगुवाई सूबे के राज्यपाल रामनाईक की देखरेख में होगा। उनके आगमन को लेकर तैयारियां जहां तेज हो गई हैं। सात घंटे के कार्यक्रम में महामहिम आदिवासी बच्चों को धनुर्विद्या, जलसंरक्षण और भारतीय संस्कार के पाठ पढ़ाते नजर आएंगे।
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छत्तीसगढ़ सीमा से सटे चपकी में सेवा समर्पण संस्थान वर्षों में आदिवासियों, खासकर नई पीढ़ी के चेतना का केंद्र बना हुआ है। 2003 से आदिवासियों को विधा तीरंदाजी में भी पारंगत बनाया जा रहा है। इसके लिए प्रतिवर्ष 30 बच्चों को आवासीय और पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है। इसे मजबूती देने के लिए यहां अब धनुर्विद्या केंद्र की स्थापना की गई है। इसके लिए सात विदेशी धनुष भी उपलब्ध हो गए हैं। एक जुलाई को खुद राज्यपाल इस केंद्र का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान देशज (आदिवासी बच्चे) धनुर्धर जहां अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगे। वहीं उनका विद्यारंभ संस्कार, मुंडन संस्कार कर उन्हें भारतीय संस्कारों का पाठ पढ़ाई जाएगी। दो तालाब का भी शिलान्यास कर महामहिम लोगों को जल संरक्षण का संदेश देंगे। यहां अध्ययन करने वाले, आने-जाने वालों को दिक्कत न हो, इसके लिए राज्य पाल के हाथों एक हजार व्यक्तियों के क्षमता वाले भोजनालय का भी शिलान्यास होगा। इस दौरान सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ सिंह एक चिकित्सालय की आधारशिला करेंगे।
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