सोनभद्र। एनजीटी के ओवरसाइट मानीटरिंग कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति राजेश कुमार ने बृहस्पतिवार की शाम कलेक्ट्रेट सभागार में प्रदूषण के मसले पर बैठक ली। दिन ब दिन बिगड़ते हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदूषण प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल और दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए। उन्होंने दूषित पानी को बीमारियों का बड़ा कारण मानते हुए कहा कि लगातार बीमारियां बढ़ रही है लेकिन जिम्मेदार इस पर संजीदगी दिखाने की बजाय,अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं।
म्योरपुर, बभनी, दुद्धी और चोपन में बंद पड़े फ्लोराइड रिमूवल प्लांटों को लेकर गहरी नाराजगी जताई। एक्सईएन जल निगम यूनिसेफ शाखा की क्लास लेते हुए कहा कि जब इसके नियमित निगरानी के लिए तंत्र मौजूद हैं। हर साल इसका ठेका भी दिया जाता है, फिर भी इतनी लापरवाही समझ से परे है। कहा कि इसको लेकर जल निगम के महाप्रबंधक को नोटिस भी भेजा जाएगा। एनसीएल ककरी और बीना परियोजना की तरफ से शुद्ध पेयजल उपलब्धता में बरती जा रही लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की बात कही। याचिकाकर्ता जगतनारायण द्वारा 92 गांव में शुद्ध पेय जल की आवश्यकता होने और 52 गांव में ही सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी देने पर उन्होंने डीएम को निर्देशित किया कि वंचित गांवों की सूची बनाकर प्राथमिकता पर वहां के बाशिंदों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएं। रेणुका नदी और रिहंद जलाशय में छोड़े जा रहे रासायनिक कचरे पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया। डीएम अमित कुमार सिंह ने कहा कि एनजीटी के निर्देशों का हर हाल में पालन कराया जाएगा। इस मौके पर क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी आनंद कुमार, अभिमन्यु शर्मा आदि मौजूद रहे।