सोनभद्र। पिछली सरकार में मनरेगा, शौचालय, 14वें वित्त के तहत विकास कार्य कराने के लिए काफी धन आया था। विकास के नाम पर पैसे तो बहाये गए, लेकिन अधिकांश गांवों मेें इसका रिकॉर्ड नहीं रखा गया। जनपद में विकास के नाम पर आए पैसे को किस मद में प्रयोग किया गया है। इसकी जानकारी के लिए जनपद के हर ब्लाक से उन पांच गांवों का चयन किया जा रहा है जहां सबसे ज्यादा पैसा भेजा गया है। इसकी जांच के लिए डीएम की ओर से आठ टीमें गठित की जाएगी।
बताते चले कि सपा सरकार में मनरेगा, शौचालय, 14वें वित्त में अरबों रुपये धन प्राप्त हुआ था। अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों को विकास कार्य कराने के धन आवांटित किया। कुछ माननीयों के दबाव मेें अधिकारियों ने मनमाने ढंग से राबटर्सगंज, घोरावल, चतरा, नगवां, चोपन, म्योपुर, बभनी और दुद्धी ब्लॉक के दर्जनों गांवों में नियमों का उल्लंघन कर सबसे अधिक धन मुहैया कराया। लेकिन नक्सल प्रभावित इलाकों के कई गांवों में विकास कार्य कराने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। मानक के विपरित अधिकांश सड़कें, पुलिया आदि का निर्माण नहीं हुआ। इसका नतीजा रहा है कि कुछ माह बाद ही सड़केें क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि योगी सरकार ने जिला प्रशासन को पिछली सरकार में जिन गांवों में सर्वाधिक धन भेजा गया है था उनकी जांच कराने का निर्देश दिया है। ताकि यह पता चल सकें कि जितना धन मुहैया कराया गया था उसके उसके सापेक्ष शौचालय, सड़क, पुलिया, खड़ंजा, नाली आदि कार्य कराए गए है या नहीं। इस संबंध में जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्याय का कहना है कि प्रथम चरण में ऐसे 40 गांवों का चयन किया जा रहा है, जिनमें पिछली सरकार में सबसे अधिक धन भेजा गया था। जिलास्तरीय अधिकारियों नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम चयनित गांवों का स्थलीय निरीक्षण कर उपलब्ध कराए गए धन से कौन-कौन सा कार्य कितने की लागत से कराया गया है, इसकी जांच करेगी।