सोनभद्र। मरीजों को सस्ती जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र बदहाली के शिकार हो गए हैं। हाल यह है कि जिले के 23 में से 12 जन औषधि केंद्र बंद हो गए हैं। शेष 11 केंद्रों पर भी दवाओं की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। इससे इनके संचालन पर भी संकट आ गया है। मरीजों को विवशता में बाहर की दुकानों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
आदिवासी बहुल जिले के लोगों को सस्ता उपचार मुहैया कराने के मकसद से जन औषधि केंद्रों का संचालन शुरू कराया गया था। इसका जोर-शोर से प्रचार हुआ। नतीजा यह निकला कि कई लोग इसके संचालन के लिए आगे आए। देखते ही देखते जिले में 23 जन औषधि केंद्र खुल गए। इसमें कुछ स्वास्थ्य केंद्र परिसर में खुले तो कई का बाजारों में संचालन शुरू हुआ। दवाओं की प्रतिस्पर्धा में ये केंद्र लंबे समय तक टिक नहीं सके। वर्तमान समय में नगर से लेकर ग्रामीण अंचल तक विभिन्न कारणों से 11 केंद्र बंद हो चुके हैं तो कई बंद होने के कगार पर हैं। इनमें कई केंद्र ऐसे भी हैं, जिनका पंजीकरण तो हुआ मगर उन्हें संचालित नहीं किया गया। केंद्रों से अपेक्षित मात्रा में दवाओं की बिक्री नहीं होने से संचालक अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। अधिकतर चिकित्सकों के अपने तय मेडिकल स्टोर हैं। इसके साथ ही दवा कंपनियों से उनके कमीशन भी निर्धारित हैं।
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यहां बंद हो गए केंद्र
केकराही बाजार में पूर्व में संचालित दो जन औषधि केंद्र बंद हैं। सीएचसी दुद्धी का केंद्र भी बंद है। घोरावल बाजार में खुला जन औषधि केंद्र बंद हो चुका है। दुद्धी बाजार में भी एक केंद्र खुलना था लेकिन संचालित नहीं हो सका है। इसका प्रमुख कारण चिकित्सकों की ओर से जन औषधि केंद्र की दवाएं न लिखना है। इसके अलावा घोरावल बाजार में संचालित जन औषधि केंद्र बिक्री न होने के कारण बंद है। कोन बाजार में भी खोले गए केंद्र पर बिक्री न होने से ताला लग गया। इसका लाइसेंस भी पूर्व में सरेंडर कर दिया गया। म्योरपुर में दवाओं की कम बिक्री के कारण केंद्र बंद है।
दो साल से संचालन का इंतजार
सहकारी समितियों की ओर से भी जन औषधि केंद्र का संचालन किया जाना था। औषधि विभाग की ओर से लाइसेंस भी उपलब्ध करा दिया गया। केकराही, औराही मोड़, खलियारी और विंढमगंज में केंद्र खुलने थे। हालांकि बिलिंग न होने के कारण अभी यहां दो साल बाद भी दवाएं नहीं पहुंच सकी है। लिहाजा यह केंद्र संचालन से पूर्व ही बंद हो गए।
संचालकों ने कहा : बिक्री नाम मात्र
पहले की तुलना में अब बिक्री आधी हो गई है। कई बार जन औषधि की दवाएं खराब बताकर लौटा दी जाती हैं। लोग बाहर के मेडिकल स्टोर से अधिक दवाएं खरीदते हैं। बिक्री न होने से भारी मात्रा में दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं। ऐसे में कई जन औषधि केंद्र संचालक भी धड़ल्ले से महंगी दवाएं केंद्र की आड़ में बेचते हैं। लोग इनके यहां सस्ती दवाएं लेने तो पहुंचते हैं, मगर महंगी दवाएं इन्हें थमा दी जाती हैं।
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ये केंद्र अभी दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं
जिले में करीब 11 केंद्र अभी दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें चार सरकारी अस्पताल तो 7 प्राइवेट स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। जिला अस्पताल, सीएचसी घोरावल, एनटीपीसी शक्तिनगर और बीजपुर में एक-एक केंद्र हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल परिसर, केकराही, चोपन बाजार, अनपरा, शक्तिनगर एनसीएल परिसर, रॉबर्ट्सगंज रोडवेज सहित तीन अन्य केंद्र बाहर संचालित हैं। इनकी बिक्री 50 फीसदी तक कम हो गई है। समय से दवाओं की आपूर्ति में कमी भी इसका प्रमुख कारण है।
जन औषधि केंद्रों से दवाएं लिखने के लिए लगातार चिकित्सकों को निर्देशित किया जाता रहा है। जांच में जो भी लापरवाही करते मिलेंगे। उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।