सोनभद्र। जिले की साक्षरता दर को दुरुस्त करने के लिए 15 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष और महिलाओं की निरक्षरों की पहचान करने का अभियान शुरु हो चुका है। इसकी जिम्मेदारी परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के कंधे पर है। बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने समस्त शिक्षकों से सर्वे का कार्य पूर्ण कर हरहाल में एक दिसंबर तक अपनी-अपनी रिपोर्ट को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके बाद बीएसए अपने स्तर से निरक्षरों का पूरा आकड़ा शासन को भेजेंगे।
भाजपा सरकार ने सभी निरीक्षरों को साक्षर बनाने की दिशा में पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में सूबे के आठ पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र में अब निरक्षरों को चिन्हित कर उन्हें साक्षर बनाया जाएगा। इसी क्रम में राबट्र्सगंज, घोरावल, चतरा, नगवां, चोपन, म्योरपुर, बभनी और दुद्धी ब्लॉक में स्थित परिषदीय 2464 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को 15 वर्ष से अधिक आयु के निरीक्षर महिला और पुरूषों की रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर निरीक्षरों के बारे में पता लगाकर उनकी रिपोर्ट भी तैयार करने में जुटे हुए हैं। बताते चले कि जंगली एवं पहाड़ी क्षेत्रों में सर्वाधिक अनपढ़ लोग निवास कर रह रहे हैं।
जबकि वर्तमान में प्रत्येक राजस्व गांव में परिषदीय स्कूल संचालित हो रहे है और स्कूलों में पढने वालों को मुफ्त में भोजन भी मिल रहा है। इस संबंध में बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने कहा कि सभी शिक्षकों को 48 घंटे के भीतर निरक्षरों की रिपोर्ट उनकी कार्यालय में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद निरक्षरों की सूची शासन को भेजी जाएगी। फिर उनके लिए शासन स्तर से योजनाएं संचालित की जाएगी।