सोनभद्र। अगलगी की घटनाओं पर तत्काल काबू पाने के लिए सपा सरकार में तहसील मुख्यालयों पर फायर स्टेशन स्थापित करने की पहल शुरू की गई थी। लेकिन सूबे में सत्ता परिवर्तन होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब तक घोरावल एवं दुद्धी तहसील क्षेत्र में फायर स्टेशन की स्थापना नहीं हो पाई है।
जिले का अधिकांश क्षेत्रफल जंगलों एवं पहाड़ों से आच्छादित है। ग्रामीण इलाकों में बिजली के तार ढीले है। काफी संख्या में पोल भी टेढे़ हो गए हैं। इसकी वजह से आंधी चलने पर तारों में शार्ट सर्किट होता है। गर्मी के दिनों में खेतों से होकर गुजरने वाले तारों में शार्ट सर्किट होने से खड़ी फसल एवं खलिहानों में रखे फसलों में आग लग जाती है। इससे प्रत्येक वर्ष किसानों का लाखों रुपये का अनाज जलकर राख हो जाता है। इसके अलावा मकानों, दुकानों में भी अगलगी की घटनाएं होती हैं। दुद्धी और घोरावल तहसील क्षेत्र में अगलगी की घटनाएं होने पर उस पर काबू पाने के लिए समय लगता है। क्योंकि यहां पर दमकल के वाहन ही नहीं है। अगलगी की सूचना मिलने पर राबर्ट्सगंज तहसील मुख्यालय से दमकल को भेजा जाता है। जब तक दमकलकर्मी पहुंचते है तब तक जलकर राख हो जाता है। हालांकि अगलगी की घटनाओं पर शीघ्र काबू पाने के लिए वर्ष 2014-15 में सपा सरकार ने जिला प्रशासन को तहसील स्तर पर फायर स्टेशन की स्थापना करने करने के लिए रिपोर्ट मुहैया कराने निर्देश दिया था। लेकिन वर्ष 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद फायर स्टेशनों के स्थापना की पहल ठप हो गई। जिला अग्निश्मन अधिकारी सुरेश चंद्र के मुताबिक जिले में आग बुझाने के लिए चार वाहन है। राबर्ट्सगंज में दो दमकल वाहन एवं चोपन में दो दमकल वाहन खड़े रहते हैं। आग लगने की सूचना मिलने पर वाहनों को भेजा जाता है। कहा कि अभी तक घोरावल एवं दुद्धी तहसील में फायर स्टेशन की स्थापना नहीं हो पाई है, लेकिन प्रयास किया जा रहा है।