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लापरवाह सेकेट्ररियों और प्रधानों पर गिरेगी गाज

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सोनभद्र। जिले को दो अक्टूबर तक ओडीएफ घोषित करना है। लेकिन कई सेकेट्ररियों और प्रधानों की लापरवाही से शौचालयों का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से हो रहा है। इससे निर्धारित समय सीमा के भीतर संपूर्ण गांवों को खुले में शौच मुक्त किया जाना संभव नहीं दिख रहा। डीएम ने डीपीआरओ से शौचालयों का निर्माण कराने में रूचि न लेने वाले सेक्रेटरियों एवं प्रधानों की सूची मांगी है। लापरवाही बरतने वाले सेक्रेटरियों को निलंबित कर ग्राम प्रधानों का खाता सीज किया जाएगा।
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बतादें कि शासन ने दो अक्टूबर को जिले के 1403 गांवों को खुले में शौचमुक्त करने के उद्ेश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत जरूरतमंदों का शौचालय बनवाया जा रहा है। लेकिन कई ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान शौचालयों का निर्माण कराने में रूचि नहीं ले रहे है। इस नाते शौचालयों का निर्माण कार्य जिस गति से होना चाहिए उस गति से नहीं हो रहा डीपीआरओ से दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार अब तक करीब सात 764 गांव ही खुले में शौचमुक्त हो सके हैं। शेष 639 गांवों में शौचालयों का निर्माण चल रहा है। चोपन के 93 गांवों में से 15 गांव, दुद्धी के 99 गांव में से 34 गांव, बभनी ब्लॉक के 72 राजस्व गांवों में से 50 गांव, चतरा के 181 गांवों में से 101 गांव, घोरावल के 349 गांव में से 182 गांव, नगवां के 134 गांव में से 46 गांव, म्योरपुर के 123 गांव में से 41 गांव और राबट्सगंज ब्लॉक के 352 राजस्व गांवों में से 275 गांव ही खुले में ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। डीएम अमित कुमार सिंह ने कहा कि शौचालयों का निर्माण कराने में दिलचस्पी नहीं लेने वाले सेक्रेटरियों को निलंबित और प्रधानों का खाता सीज कर उनके विरूद्ध अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ को अविलंब लापरवाहों की सूची मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है।
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