सोनभद्र। कोर्ट के कूड़ा निस्तारण के समुचित प्रबंध के कड़े निर्देश और इस जलाने पर सख्त पाबंदी के बावजूद सोनभद्र में इसका पालन नहीं हो रहा है। नगर पालिका और नगर पंचायत के अफसर जहां तहां कूड़ा फेंककर जला रहे हैं। नगर पंचायतों की कौन कहे, जिले की एकमात्र नगरपालिका राबट्सगंज में ही कूड़ा निस्तारण का बुरा हाल है। पॉश कालोनियों में जहां जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा है। वहीं निस्तारण के नाम पर भी उसे जहां-तहां फेंक दिया जा रहा है। ढेर कम करने के नाम पर आग भी लगा दी जा रही है। इससे लोगों को परेशानियों के साथ प्रदूषण की भी समस्या बढ़ती जा रही है।
स्थिति यह है कि सवा से डेढ़ लाख आबादी वाले राबर्ट्सगंज नगरपालिका के ज्यादातर हिस्सों से कूड़े की नियमित उठान ही नहीं हो पा रहा है। विकासनगर, न्यू कालोनी, सिविल लाइंस रोड, मेन मार्केट, नई बस्ती, पूरब महाल, उत्तर महाल, अंबेडकर नगर, हर्षनगर, ब्रह्मनगर, अशोकनगर, हाइवे से सटे हिस्सों में गंदगी का साम्राज्य बना हुआ है। कहने को कागज पर इन हिस्सों में रोजाना कूड़ा निस्तारण ट्राली और कर्मियों का आना-जाना बना हुआ है लेकिन गंदगी से बजबजाती नालियों के जहां-तहां कूड़े के ढेर और उससे उठती सड़ांध दावों की पोल खोल देती है। हालांकि जिन कूड़ों की उठान हो रही है, उसके निस्तारण के नाम पर भी दूसरे जगह कूड़े का ढेर ही इकट्ठा किया जा रहा है। इससे संबंधित जगह के आस-पास के लोग भी परेशान हो उठे हैं। कई बार इस ढेर में आग भी लगा दी जाती है, जिससे उठता धुआं भी ढेरों लोगों की परेशानी के साथ प्रदूषण का कारण बन जाता है। कालोनियों में जहां-तहां कूड़ा जलाने का नजारा दिखता रहता है सो अलग।
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कूड़ा निस्तारण में लापरवाही की बात गलत है। नगर से प्रतिदिन करीब दस टन कूड़ा निकल रहा है। जिसे खाली भूमि में रखकर, उसके उपर मिट्टी पाट दिया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण को चेंबर बनाने के लिए रौप में स्थल चयन का काम पूरा कर लिया गया है। शासन से अनुमति मिलते ही, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
दिनेश कुमार, ईओ, नगरपालिका राबट्रर्सगंज
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कूड़ा जलने से निकलने वाले धुएं से श्वांस की बीमारी होती है। अस्थमा की रोगियों के लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। यह शरीर के लिए हर तरह से नुकसानदायक है।
एसपी सिंह, सीएमओ, सोनभद्र।