सोनभद्र। जिले में डेंगू का प्रकोप लगातार जारी है। बचाव के समुचित इंतजाम न होने से बीमारी तेजी से फैल रही है। सबसे ज्यादा मरीज रेणुकूट और पिपरी क्षेत्र में मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अब 107 डेंगू संदिग्ध मिल चुके हैं। इसमें 52 मरीजाें में डेंगू की पुष्टि हुई है। सर्वाधिक 40 मरीज सिर्फ म्योरपुर ब्लाॅक के हैं। यह आंकड़ा तब है, जबकि इस क्षेत्र में संचालित कई निजी अस्पताल व पैथालॉजी की ओर से नियमित रिपोर्ट विभाग को नहीं दी जा रही है।
बारिश के बाद से ही जिले में मच्छरजनित बीमारियाें का प्रकोप शुरू हो गया था। पहले मलेरिया ने पांव फैलाया। फिर टायफाइड और डेंगू का प्रसार तेजी से हो रहा है। रेणुकूट और पिपरी का कोई मोहल्ला ऐसा नहीं रहा, जहां इन बीमारियों के मरीज न हों। कई परिवाराें में तो तीन-चार सदस्य बीमारी से ग्रसित हो चुके हैं। हालांकि ज्यादातर लोग अपना उपचार निजी अस्पतालों में ही करा रहे हैं, जिसके चलते पीड़ितों की सही संख्या नहीं पहुंच पा रही। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ाें पर गौर करें तो शुक्रवार की शाम तक जिले में 107 लोगों को डेंगू संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया गया था, जिसमें से 52 में डेंगू की पुष्टि हो चुकी थी। इसमें भी 40 मरीज अकेले म्योरपुर ब्लाक क्षेत्र से पाए गए हैं। इसके बाद चतरा और घोरावल में चार-चार मरीज मिले हैं, जबकि चोपन में दो, नगवां, केकराही में एक-एक पुष्ट मरीज पाए गए हैं। दुद्धी, बभनी ब्लाॅक में डेंगू के एक भी मरीज न होने का दावा किया गया है।
दो मरीजों की जांच में निकला डेंगू, एक रेफर
म्योरपुर। स्थानीय सीएचसी में रोजाना हो रही डेंगू की जांच में शनिवार को म्योरपुर कस्बे और इससे सटे कुंडाडीह गांव के एक-एक मरीज को डेंगू संदिग्ध पाया गया। उन्हें उपचार के लिए डेंगू वार्ड में भर्ती किया गया है। शनिवार को गुंजा (35) पत्नी रमेश निवासी म्योरपुर व विश्वनाथ (33) पुत्र भिखारी निवासी कुंडाडीह को प्रारंभिक जांच में डेंगू संक्रमित पाया गया। सीएचसी में दो दिनों से भर्ती लक्ष्मी सैनी (18) निवासी मुर्धवा को शनिवार को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लक्ष्मी का प्लेटलेट्स घटकर 38 हजार हो गया था। उसकी मौसी आशा सैनी (35) पत्नी सूरज सैनी का इलाज म्योरपुर में ही चल रहा है। अधीक्षक डॉ. राजन सिंह ने कहा कि उनके स्तर से लोगों को जागरूक करने के साथ ही एहतियात बरतने की सलाह भी दी जा रही है।