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Sonebhadra News: ट्रैक मरम्मत पर हर साल 10 करोड़ खर्च, ढाई साल में सात हादसे और दोष मौसम का

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रेलवे ट्रैक की मरम्मत पर अनपरा परियोजना हर साल दस करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, बावजूद कोयला लदी गाड़ियों के बेपटरी होने का सिलसिला नहीं थम रहा। पिछले ढाई साल में सात बार घटनाएं हुई हैं। इसमें परियोजना को लाखों की क्षति पहुंची है।
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हर साल हादसे के बाद जांच होती है, मगर इसकी रिपोर्ट कभी सामने नहीं आती। अफसर सिर्फ मौसम को जिम्मेदार बताकर जांच पूरी कर लेते हैं। गर्मी में कभी ट्रैक फैल जाता है तो सर्दी में सिकुड़ता है, अब बरसात में मिट्टी खिसकने को हादसे का कारण बताया जा रहा है।
अनपरा परियोजना राज्य उत्पादन निगम की प्रदेश को सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाली परियोजना है। कोल खदान के मुहाने पर होने के कारण भी यहां बिजली उत्पादन का खर्च कम आता है। एनसीएल की विभिन्न खदानों से कोयला लाने के लिए रेल लाइन बिछाई गई।
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करीब डेढ़ दशक पुरानी इसी लाइन से ही कोयला लदी गाड़ियों का आवागमन होता है। परियोजना को नियमित कोल आपूर्ति के लिए लाइफ लाइन होने के बाद भी इसकी देखरेख और मरम्मत को लेकर जिम्मेदार बेपरवाह हैं। मरम्मत के लिए हर साल बजट पास होता है और खर्च भी होता है, लेकिन बस कागजों पर। इसी की नतीजा है कि आए दिन हादसे हो रहे हैं।

राइट्स ने दिया था 50 करोड़ का प्रस्ताव, बजट ही नहीं मिला
परियोजना सूत्रों की मानें तो करीब दो वर्ष पूर्व हुए हादसे के बाद रेलवे ट्रैक की मरम्मत के लिए रेलवे की अनुभवी संस्था राइट्स को आमंत्रित किया गया था। संस्था ने अनपरा तापीय परियोजना से लेकर खड़िया साइलो तक सर्वे करने के बाद रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें करीब 50 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव था। मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय से इसे मंजूरी के लिए शक्ति भवन भेजा गया, मगर ठंडे बस्ते में चला गया। इस प्रस्ताव के मंजूर न होने से ट्रैक की विशेष मरम्मत का कार्य ठप हो गया। अब परियोजना हर साल सामान्य मरम्मत का कार्य अपने स्रोतों से करा रही है। इस पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसी खर्च में ट्रैक के साथ वैगन और इंजन की मरम्मत भी शामिल है।

इसी लाइन से लैंकों में भी जाता है कोयला
अनपरा परियोजना को जिस लाइन से कोयला जाता है, उसी का उपयोग मेघा ग्रुप की लैंको तापीय परियोजना भी कोयला ढुलाई में करती है। इसके बदले ट्रैक मरम्मत के लिए लैंको परियेाजना कुछ प्रतिशत भुगतान करती है।


डीरेल होने का कारण है मौसम
हादसे के बाद मरम्मत कार्य में लगे कर्मचारियों ने बताया कि रविवार की डीरेल की घटना का कारण भारी बारिश रहा है। बारिश से मिट्टी किनारे से खिसकने लगी और ट्रैक पर लोड वैगन डीरेल हो गई। इसके पूर्व भी डीरेल की घटना में मौसम ही कारण रहा था। गर्मी के दिनों मे ट्रैक फैलता है और ठंडी के दिनों में ट्रैक सिकुड़ता है। पूर्व में जितने भी वैगन या इंजन डीरेल हुए हैं तब वैगन में काेयला लदा था।

दूसरी लाइन से जारी रही ढुलाई
रविवार को अनपरा तापीय परियोजना की दो वैगन डीरेल होने के कारण एक लाइन पूरी तरह बंद हो गई। इस बीच दूसरी लाइन से कोयला ढुलाई का काम जारी है। परियेाजना की मरम्मत टीम युद्धस्तर पर रेलवे ट्रैक को ठीक करने में लगी हुई है। इंजन को ट्रैक पर रखने काम पूरा कर लिया गया है। देर रात तक ट्रैक मरम्मत पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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