सीतापुर। शहर में उफनाई सरायन नदी की बाढ़ लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। शहरी इलाके के करीब 15 मोहल्ले बाढ़ की चपेट में हैं। कई प्रमुख मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। सैकड़ों घरों में पानी भरने से लोग आश्रय स्थल के अलावा परिचित व रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। ग्वालमंडी के कई परिवार रेलवे ट्रैक के किनारे तंबू बनाकर गुजर बसर कर रहे हैं। प्रशासन व पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
उधर, सरायन नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से नाराज केशव ग्रीन सिटी के निवासियों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाइवे को पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इससे हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। मंगलवार को नदी के पानी में हुई वृद्धि के बाद जलस्तर खतरे के निशान 131 मीटर को पार कर 134 मीटर तक पहुंच गया।
सरायन नदी का जलस्तर मंगलवार को 40 सेंटीमीटर और बढ़ा। बाढ़ के पानी से आलमनगर व दुर्गापुरवा के मुख्य मार्ग डूब गए हैं। तरीनपुर, अंसारीटोला, कमेला, लोनियानपुरवा, शास्त्रीनगर समेत 15 मोहल्लों में बाढ़ के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। घरों में पानी भर जाने के बाद कोई छत पर गुजर बसर कर रहा है तो किसी को घर छोड़ना पड़ा है। ग्वाल मंडी पुरानी आबादी नाले के पास तीन से चार फीट तक पानी भरा है। घरों के अंदर पानी पहुंचने से पंकज, विशाल, अशोक, रामदुलारी, मोहिनी, संजय आदि ने रेलवे ट्रैक के किनारे अस्थाई बसेरा बनाया है। पीड़ितों का कहना है कि यहां अभी तक किसी तरह की कोई मदद नहीं पहुंची है।
वहीं, डीएम डॉ. राजा गणपति आर ने मंगलवार सुबह बाढ़ प्रभावित शास्त्रीनगर, नई बस्ती व लोनियनपुरवा का दौरा कर बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
डीएम ने पीएसी बटालियन सक्रिय कर रेस्क्यू अभियान भी शुरू कराते हुए प्रभावित इलाकों के लोगों से आश्रय स्थल व रैन बसेरों में जाने की अपील भी की है। प्रशासन के मुताबिक अब तक 600 से ज्यादा बाढ़ पीड़ितों ने विभिन्न आश्रय स्थलों में शरण ली है।