सीतापुर। जीएसटी में खेल के लिए बोगस फर्म बनाकर बेचने वाले आरोपियों ने बताया कि वह लोगों को नौकरी लगवाने का लालच देकर उनके दस्तावेज हथिया लेते थे। फिर उन्हीं के नाम की बोगस फर्म बनाकर अन्य लोगों को बेचते थे। इसी कमाई से ही लाखों रुपये के जेवर व कार आदि खरीदीं।
सीओ सिटी ने बताया कि बदमाशों ने 19 राज्यों में 1221 फर्मों को बनाकर बेचा है। अब तक की जांच में उत्तर प्रदेश में 303, दिल्ली में 348, हरियाणा में 144, बिहार में बेची गई 86 बोगस फर्मों की बात सामने आई है। एक फर्म को बनाकर बेचने पर करीब 30 हजार रुपये तक का फायदा मिलता था। वह ग्राहकों की मांग के अनुसार फर्म बनाने का काम करते थे। गिरफ्तार बदमाशों को जेल भेज दिया गया है।
पुलिस उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने इन फर्मों को खरीदा है, क्योंकि जो टैक्स चोरी हुई उसको चोरी करने वाले तो असल में वही हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी एक ऑनलाइन साइट बनाकर लोगों को नौकरी का लालच देते थे। जब कोई अपने दस्तावेज साझा करता था। जीएसटी रजिस्ट्रेशन करने के लिए ओटीपी की जरूरत होती थी। ऐसे में लोगों से ओटीपी लेने के लिए एक आरोपी की प्रेमिका लोगों को फोन करती थी। वैरीफिकेशन या अन्य बहाने से वह एक बार ओटीपी लेकर फर्म का जीएसटी पंजीयन करा लेते थे। आरोपी एक साइट की मदद से फर्जी आधार भी बनाते थे।
खुलासे पर विभाग में मचा हड़कंप
जांच में जब इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया। विभाग के एक अधिकारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी, जिसके बाद गिरोह का पर्दाफाश हुआ।