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वर्दी वाली बेटियां मिटा रहीं दिलों की दूरियां

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शहर कोतवाली में महिला हेल्प डेस्क पर पीड़िता की शिकायत सुनती महिला पुलिस। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
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शहर कोतवाली इलाके के मोहल्ला मिरदही टोला निवासी आसमा ने महिला हेल्प डेस्क पर पहुंचकर पति के प्रताड़ित करने की बात कही। साथ में नहीं रखने की धमकी देते हैं। महिला हेल्प डेस्क ने मामले से शहर कोतवाल टीपी सिंह को अवगत कराया। तारीख मुकर्रर कर दोनों पक्षों को बुलाया गया, जहां पर महिला हेल्प डेस्क ने कई घंटे तक दंपती को बैठकर समझाया। बात पति के समझ में आई और वह पत्नी के साथ रहने को तैयार हो गया।
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शहर कोतवाली इलाके के ही सोनारी निवासी कांती ने पति पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए महिला हेल्प डेस्क पर शिकायत की थी। पति-पत्नी को कोतवाली बुलाकर समझाया। साथ रहने, विवाद नहीं करने और केस दर्ज होने पर कानूनी कार्रवाई से सामना करने की चेतावनी दी। बात पति के समझ में आ गई। उसने लिखित में विवाद नहीं करने की बात कहकर पत्नी को खुश रखने का वादा करके चला गया।
खैराबाद इलाके की एक विवाहिता ने महिला हेल्प डेस्क पर पहुंचकर बताया कि उसकी ननद और सास-ससुर परेशान करते हैं। तीनों लोग बात-बात पर विवाद करते रहते हैं। वह ससुराल में नहीं रहना चाहती है। महिला हेल्प डेस्क ने दोनों पक्षों को आमने-सामने किया। बात सुलझ गई। सास-ससुर ने बेटी की तरह बहू से लाड़-प्यार करने की बात कह उसे घर ले गए।
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सीतापुर। सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से आधी आबादी को त्वरित न्याय दिलाने की मंशा से शुरू की महिला हेल्प डेस्क अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर रही है। पीड़िताओं के आंसू पोछकर इंसाफ दिलाने का काम किया जा रहा है। यही वजह है कि सीएम की यह पहल जिले में परवान चढ़ती नजर आ रही है। महिला हेल्प डेस्क पर बैठी ये वर्दी वाली बेटियां दो दिलों की दूरियां भी मिटाने काम काम बखूबी कर रही हैं।
महिलाओं की समस्या और परेशानियों को सुनने के बाद आपसी सुलह समझौते से ही रिश्तों की खाई पाटने का काम करती है। वर्दीधारी बेटियों की पूरी कोशिश रहती है कि आपसी मनमुटाव के मामले कानूनी दांव-पेंच में फंसकर न उलझें। बेहतर होगा कि दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर रिश्तों की कमजोर हो रही डोर को मजबूत की जाए।
महिला हेल्प डेस्क इसी मंशा के साथ काम करते हुए दंपती के गिले-सिकवे मिटा रही है। सिर्फ पति-पत्नी के ही रिश्तों की खाई को पाटने का काम नहीं किया जाता बल्कि ससुर-बहू, सास-बहू और जेठानी, देवरानी के रिश्तों को भी टूटने से बचाया जा रहा है। सुबह से रात तक आने वाले मामलों में अधिकतर घरेेलू मामले, हिंसा, विवाद से जुड़ी शिकायतें ही रहती हैं।
महिला हेल्प डेस्क की महिला पुलिस कर्मियों की मंशा रहती है कि किसी का घर न उजड़े, परिवार में दूरियां न पैदा हों, विवाद न हो, सभी लोग एक साथ खुशहाल होकर रहे, इसीलिए सबसे पहले आपसी सुलह-समझौते से बिखरे हुए रिश्तों को प्रेम के मोती में पिरोती हैं। इसका असर भी साफ दिख रहा है। कई रिश्ते, कई परिवार टूटने की कगार पर थे, लेकिन आज एक साथ हैं।
इस तरह के आते हैं मामले
महिला हेल्पडेस्क पर आने वाले विवादों में घरेलू मामलों की संख्या सबसे अधिक है। इसमें दंपती के बीच विवाद, मारपीट, दहेज की मांग करना, जरा सी बात मायके वालों पर ताना मारना, सास, ससुर, ननद और देवरानी, जेठानी के बीच विवाद भी आते हैं।
कार्रवाई पर रखी जाती नजर
महिला हेल्प डेस्क पर आने वाले मामलों को सुनने के बाद पुलिस कर्मी पीड़िता को पीली पर्ची थमाती हैं। मामले को कोतवाल, थानेदार के संज्ञान में लाया जाता है। पूरी निगरानी सीओ, कोतवाल करते हैं। इसके बाद बीट के सिपाही को दोनों पक्षों को महिला हेल्प डेस्क पर लाने की जिम्मेदारी दी जाती है। तय दिन, तारीख पर सुनवाई होती है। पूरे महीने तक चलने वाली इस कार्रवाई की रिपोर्ट एसपी को सभी थानों से भेजी जाती है।
महिला हेल्प डेस्क से लोगों को मदद मिल रही है। पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाया जाता है। हेल्प डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रही महिला पुलिस कर्मियों का काम सराहनीय है। वह रिश्तों और घर-परिवार को जोड़ने का काम करती हैं।
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आरपी सिंह, एसपी
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