सीतापुर। शहर में यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए ई-रिक्शाें को पालिका व यातायात पुलिस की ओर से कलर कोडिंग नंबर प्लेट वितरण में बड़ी लापरवाही सामने आई है। अफसर बिना जांच-पड़ताल के हर ई-रिक्शा को कलर कोडिंग नंबर प्लेट प्रदान कर रहे हैं। परिवहन विभाग की ओर से जांच-पड़ताल किए जाने संबंधी पत्र लिखे जाने के बाद भी पालिका के अफसर मनमाने ढंग से कलर कोडिंग नंबर बांट रहे हैं। अनफिट ई-रिक्शे सवारियों के सुरक्षित आवागमन में खतरा साबित हो सकते हैं।
शहर में फर्राटा भर रहे हर 10 ई-रिक्शों में से चार अनफिट हैं। किसी की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है किसी का बीमा। किसी ई-रिक्शा को बार-बार यातायात के नियम तोड़ने पर पांच से ज्यादा चालान होने के कारण ब्लैक लिस्ट किया गया है। किसी ई-रिक्शा का टैक्स नहीं जमा है।
दरअसल, ई-रिक्शा के लिए रजिस्ट्रेशन के समय से दो साल तक फिटनेस जांच की जरूरत नहीं होती है। इसके बाद हर साल इसकी फिटनेस जांच करानी पड़ती है। ऐसे में एआरटीओ में दर्ज ई-रिक्शा संचालक शुरूआत में दो साल का फिटनेस प्रमाण पत्र लेने के बाद फिटनेस को लेकर पूरी तरह उदासीन बन जाते हैं। बीमा कराने, अैक्स जमा करने अथवा चालान होने पर जुर्माना जमा करने में भी ई-रिक्शा चालक रुचि नहीं दिखाते हैं। शहर में ई-रिक्शों का बेतरतीब संचालन जाम व हादसों की वजह भी बनता है।
यातायात के व्यवस्थित संचालन को लेकर पालिका प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस ने रूट तय करते हुए हर ई-रिक्शा पर कलर कोडिंग नंबर प्लेट लगाने की पहल शुरू की है। इसके लिए पालिका में दो हजार ई-रिक्शा सूचीबद्ध किए गए हैं। गत 30 जनवरी को नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर गुरु से कलर कोड नंबर प्लेट वितरण शुरू कराया गया। पहले दिन 800 ई-रिक्शा चालकों को कलर कोड नंबर प्लेट वितरित की गई। कलर कोड नंबर प्लेट वितरण में जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ई-रिक्शा की फिटनेस अथवा दूसरे आवश्यक प्रपत्रों के दुरुस्त होने की जांच किए बगैर कलर कोड नंबर प्लेट बांटी जा रही हैं। तमाम ई-रिक्शाें में तो आगे का शीशा और लाइट तक गायब है। कई नाबालिग ई-रिक्शा दौड़ाते नजर आते हैं। यह हाल तब है जब परिवहन विभाग ने व्यवस्था शुरू करने से पहले ई-रिक्शों की जांच पड़ताल किए जाने संबंधी पत्र भी पालिका प्रशासन को लिखा गया है। शहर में दौड़ रहे अनफिट ई रिक्शे सवारियों के लिए जानलेवा तक साबित हो सकते हैं।
शहर में दौड़ रहे अनफिट ई-रिक्शों पर एक नजर
यूपी 34 बीटी 3809 और यूपी 34 बीटी 9068 नंबर के ई-रिक्शाें पर यातायात के नियम बार-बार तोड़ने के कारण पांच से ज्यादा चालान की कार्रवाई की गई है। इस कारण इसे ब्लैक लिस्ट किया गया है। इनकी फिटनेस अवधि भी खत्म हो चुकी है। इसके अलावा यूपी 34 एटी 3934, यूपी 34 बीटी 6147, यूपी 34 सीटी 1275, यूपी 34 बीटी 9395, यूपी 34 एटी 8804 नंबर के ई-रिक्शों की फिटनेस अवधि खत्म हो चुकी है। इसके बाद भी यह ई-रिक्शे शहर में दौड़ रहे हैं।
क्यों जरूरी है फिटनेस, वैध प्रपत्र
बिना फिटनेस, वैध प्रपत्रों के वाहन को संचालित करना मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय है। चालान व दुर्घटना आदि होने पर वाहन स्वामी पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाण पत्र वैध होने की दशा में ही ई-रिक्शा का संचालन होना चाहिए।
-मिलिंद चतुर्वेदी, अधिवक्ता
पालिका को लिखा गया था पत्र
ई-रिक्शों को कलर कोडिंग नंबर प्लेट वितरण को लेकर पालिका के ईओ पत्र लिखा था। इसमें जांच कराने की बात कही गई थी। फिटनेस वाले ई-रिक्शों को संचालन के लिए वैलिड माने जाने का अनुरोध किया गया था। इस संबंध में अधिशासी अधिकारी से बात कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
- सर्वेश चतुर्वेदी, एआरटीओ प्रशासन
एआरटीओ की जिम्मेदारी, वह चेक करें फिटनेस : सहायक नगर आयुक्त
हमारा काम सिर्फ ई रिक्शों को व्यवस्थित करना है। यह एआरटीओ की जिम्मेदारी है कि वह हमारे पास वही ई रिक्शे भेजते, जिनकी फिटनेस व अन्य कागज दुरुस्त हों। हमारा काम ई रिक्शों के प्रपत्रों की जांच करना नहीं है। यह एआरटीओ की जिम्मेदारी है कि वह फिटनेस चेक करें।
- वैभव त्रिपाठी, सहायक नगर आयुक्त, सीतापुर नगर पालिका परिषद