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बैराजों से छोड़ा गया दो लाख क्यूसेक पानी

Sun, 03 Jul 2016 11:30 PM IST
Amarujala Bureau
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नदी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पहाड़ों पर हुई बारिश व बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी से जिले की नदियों का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। खासकर घाघरा नदी जिले के गांजरी क्षेत्र के बाशिंदों काे डरा रही है। रविवार को भी शारदा व घाघरा बैराजों से 2,02,010 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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इससे गांजरी क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिस रफ्तार से नदियों का पानी बढ़ रहा है, उसे देखकर लग रहा है कि एक या दो दिन में नदी का पानी बाहर आ जाएगा। जिले के लहरपुर, तंबौर, रेउसा से लेकर रामपुर मथुरा तक बाढ़ का खौफ देखा जा रहा है।    घाघरा व शारदा बैराज से रविवार को छोड़े गए 2,02,010 क्यूसेक पानी जिले के गंाजरी क्षेत्र में बहने वाली शारदा व घाघरा नदी के जलस्तर में इजाफा हो रहा है। लहरपुर क्षेत्र से गुजरी शारदा नदी के तट पर बसे सोंसरी आदि गांवों में बाढ़ की दहशत देखी जा रही है।
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  इसी तरह से तंबौर क्षेत्र के चंदीभानपुर, काशीपुर, मल्लापुर आदि गांवों में बाढ़ की दहशत पनप रही है। शारदा नदी का पानी पूरे वेग से बहता हुआ, किनारों को पार करने के लिए बेताब नजर आ रहा है। रेउसा क्षेत्र में निर्मलपुरवा, गोडिय़नपुरवा, सिसैया बाजार, कोनी, जैतहिया, नगीना पुरवा आदि गांवों में बाढ़ का खौफ नजर आ रहा है।   ये गांव घाघरा नदी तट पर बसे हुए हैं। घाघरा नदी का पानी किनारों को छूता हुआ नजर आ रहा है। निर्मलपुरवा से करीब चार किलोमीटर दूरी तक घाघरा नदी का पानी ही पानी नजर आ रहा है। चहलारी घाट का आलम ये है कि यहां भी घाघरा पूरे वेग से बह रही है।
  यहां का पानी तटीय इलाकों में फैलने लगा है। पुल के करीब से होकर गुजरे नालों में घाघरा का पानी तेजी से आगे बढ़ रहा है। तटीय इलाकों में बसे लोगों ने चहलारी मार्ग पर डेरा जमाना शुरू कर दिया है। सड़क पर झोपड़ियां आनी शुरू हो गई हैं।
  इसे देखकर लग रहा है कि जैसे कुछ ही दिनों में बाढ़ यहां पर दस्तक दे देगी। रामपुर मथुरा क्षेत्र के अंगरौरा, कनरखी, शुक्लनपुर आदि गांवों में बाढ़ का खौफ देखने को मिल रहा है। नदी का पानी जिस रफ्तार से किनारों की तरफ बढ़ रहा है, उससे लोगों में दहशत है। शुक्लनपुरवा के निकट में घाघरा नदी खेतों का कटान कर रही है।
  पचीसा पर मंडरा रहा संकट
घाघरा नदी के उफनाने से टापू पर बसी आबादी पर संकट के बादल मडराने लगे हैं। निर्मलपुरवा से करीब चार किलोमीटर दूर घाघरा नदी के बीच टापू पर पचीसा गांव बसा है। इस टापू पर बसे लोगों के लिए कुछ दिन पहले राह आसान थी, लेकिन घाघरा के उफनाने से इस टापू को सारे मार्ग बंद हो गए हैं।
  टापू के दोनों तरफ घाघरा बहती है। टापू से जरूरी सामान को लेने के लिए लोगों को घाघरा नदी जरूर पार करनी पड़ती है। अब नदी पूरी तरह से उफान पर है, ऐसे में लोगों को नदी पार करने के लिए कुशल नाविकों का सहारा लेना पड़ रहा है। जरूरी काम पड़ने पर इस गांव के लोगों को पार आने के लिए पूरा दिन इंतजार करना पड़ रहा है।
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