महोली (सीतापुर)। तीन साल से तराई क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी से ग्रामीणों की नींदें उड़ी हैं। आलम यह है कि जंगलों में वनरोज खत्म होने के बाद बाघ अब किसानों के पालतू मवेशियों को निशाना बनाने लगा है। वहीं वनविभाग की कोशिशें हमेशा नाकाम होती ही नजर आ रही हैं।
कठिना नदी के किनारे बीते तीन सालों से बाघ चहलकदमी कर रहा है। आए दिन अब किसी चरवाहे या किसान के खूंटे पर बंधे जानवरों को निशाना बना रहा है जिससे ग्रामीण दहशत में आ गए।
कई बार किसानों से बाघ का आमना सामना भी हुआ लेकिन अभी तक कोई जनहानि नहीं हुई है। बीते दो माह में नदी किनारे बसे गांव श्यामजीरा, जहांसापुर, कोल्हौरा, महोली विधायक के पैतृक गांव बृम्हावली, करनी, कटिघरा, रघुवर दयालपुर में आमद दर्ज करा चुका है। नहर के किनारे पर बसे गांव चवाबेगमपुर, कलवारी, पीतमपुरग्रंट, रोहिला भी उसकी पहुंच से दूर नहीं हैं।
किसान रामकुमार, संदीप, नरेंद्र सिंह व दिलीप कुमार ने बताया कि क्रेशर चालू हो गए हैं। चीनी मिल में भी पेराई सत्र शुरू होने वाला है। गन्ने की फसल तैयार खड़ी है। बाघ के डर की वजह से गन्ने की कटाई करना मुश्किल हो रहा है। वन विभाग बाघ पकड़ने को लेकर संजीदा नहीं दिख रहा है।
हाल ही में बाघ की चहलकदमी पर एक नजर
बीते 10 अक्तूबर को शील्हापुर में कॉम्बिंग के दौरान ताजा पगचिह्न मिले थे। 11 अक्टूबर को चवाबेगमपुर में चंद्र कुमार की बकरी को बाघ ने निवाला बनाया था। यहां पिंजरा लगाया गया था। 13 अक्तूबर को बाघ ने पिंजरे के पीछे से हमला कर शिकार के लिए बांधी गई बकरी को घायल किया था। 20 अक्तूबर को पसिगवां गांव में मवेशी चराने गए चरवाहों के सामने ही भैंस के बच्चे पर हमला कर घायल कर दिया था।
दो टीमें लगातार बाघ प्रभावित क्षेत्र के गांवों में कॉम्बिंग कर रही हैं। इसके अलावा सात टीमे रेंजवार बनाई गईं हैं, जो प्रतिदिन कॉम्बिंग कर रही हैं। चवाबेगमपुर में पिंजरा व ट्रैप कैमरे लगे हैं। ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। सिकंदर सिंह, वन क्षेत्राधिकारी महोली