सीतापुर। जहरीली गैस से दरी फैक्टरी में सात लोगों की मौत के बाद जलालपुर गांव की तीन हजार आबादी दहशत में है। दरी फैक्टरी के पास ही केमिकल फैक्टरी है। इससे निकले जहरीले पानी से निकली गैस से लोग सहमे हैं। उन्हें आशंका है कि जहरीली गैस गांव की आबो-हवा को कहीं प्रभावित न कर दे। घटना के बाद पुलिस सक्रिय हो गई है।
एसपी एलआर कुमार, एएसपी महेंद्र सिंह चौहान सहित कई क्षेत्राधिकारी, कई थानों की फोर्स सहित भारी पुलिस बल बुला लिया गया था। पूरा क्षेत्र छावनी मेें तब्दील रहा। बिसवां स्थित जलालपुर गांव से कुछ दूरी पर दि-बालाजी आर्गेनिक्स फैक्टरी है। इसके पास ग्रामीणों के खेत हैं। चंद मीटर की दूरी पर उनके घर हैं। ऐसे में ग्रामीणों को अपना जीवन भी खतरे में लग रहा है। अब तक की जांच में जिस केमिकल के मिलने के संकेत मिले हैं, वह बेहद खतरनाक बताया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि इस फैक्टरी में हाईड्रो क्लोरिक एसिड का कारोबार किया जाता था। हालांकि, इसकी जांच शुरू हो गई है। विशेषज्ञ टीमों ने कई तरह के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही केमिकल की श्रेणी व उसके खतरनाक होने के बारे में पता चलेगा। जलालपुर गांव के लोग बेहद सहमे हुए हैं।
धुआं व वाष्प बनकर हवा को कर देता जहरीला
आरएमपी डिग्री कॉलेज के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता आरके सिंह ने बताया कि हाईड्रो क्लोरिक एसिड तीन तरह का होता है। पहला तनु, दूसरा सांध्र व तीसरा सधूम कहा जाता है। इसमें तनु व सांध्र कम खतरनाक होते हैं लेकिन सधूम बेहद खतरनाक श्रेणी में आता है। उनका कहना है कि यह धुआं व वाष्प बनकर हवा में घुल जाता है। यह जीवन के लिए खतरनाक है।
एसडीएम की अध्यक्षता में टीम करेगी जांच
डीएम ने कहा कि मामले की जांच एसडीएम बिसवां सुरेश कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम करेगी। एनडीआरएफ टीम बुलाई गई थी। क्षेत्र के अस्पतालों में भी जांच कराई गई कि कहीं कोई गैस रिसाव से प्रभावित व्यक्ति तो नहीं है। चिकित्सा विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी जांच की। एनडीआरएफ के सुझाव पर प्रभावित स्थान पर मिट्टी डलवाने का कार्य किया जा रहा है।