गांजर क्षेत्र में बाढ़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। खासकर, पचीसा गांव में घाघरा कहर बरपा रही है। इस टापू पर बसे लोग दहशत में दिन व रात काट रहे हैं। रविवार रात तीन घर कटकर घाघरा नदी में बह गए। कटान के भय से करीब 16 परिवारों ने आशियानों को छोड़ दिया है और ऊंचे स्थान पर डेरा डाल दिया है।
उधर, घाघरा और शारदा बैराजों से सोमवार को भी करीब ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में भी सुधार जैसे हालात नजर नहीं आ रहे हैं। तंबौर क्षेत्र से लेकर रामपुर मथुरा क्षेत्र तक शारदा व घाघरा नदी कहर बरपा रही है। करीब 108 गांव बाढ़ की जद में हैं। सबसे बड़ा नुकसान रेउसा व रामपुर मथुरा क्षेत्र में हो रहा है।
जहां बीते 22 दिनों से लोग बाढ़ की चपेट में हैं। 80 के करीब ऐसे गांव हैं, जहां के लोग बाढ़ से बाहर नहीं निकल सके हैं। कई घरों में राशन नहीं बचा है। घाघरा नदी टापू पर बसे पचीसा गांव में तेजी से कटान कर रही है।
रविवार रात गांव के मूलचंद, सतनाम व दिनेश के घर कटकर नदी में बह गए। इन घरों में रहने वाले परिवार पहले ही घरों को खाली कर चुके थे। यहां घाघरा नदी 18 घरों को काट चुकी है। कटान से भयभीत नारायन, लखन, नन्हकन्नू ,नरेश, मनोज, बुधराम, सरजू, मुनेजर, छबीले, राजीव, मोती लाल, जवाहर,सहदेव, इंद्रजीत, रामसिंह, भगोले, पवन, रामनाथ, पप्पू, नन्हके, पैकरमा, सुंदर लाल, खुराली आदि करीब 16 परिवारों ने अपने घरों को छोड़ दिया है।
टापू का करीब दो किलोमीटर का हिस्सा बाढ़ की चपेट में हैं। बचे हिस्से में घाघरा नदी कटान कर रही है। टापू से बाहर निकलने के लिए पीड़ितों को करीब सात किलोमीटर दूरी तक जलमार्ग तय करना होगा।